बिहार में राजनीतिक स्थिरता और विकास का दावा
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आजतक के साथ विशेष बातचीत में कहा कि राज्य में भाजपा और जेडीयू का गठबंधन अब समान स्तर का है, जिसे वे ‘जुड़वा भाई’ की संज्ञा देते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2005 से पहले बिहार में कोई उल्लेखनीय विकास नहीं हुआ था, और उसके बाद से ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य ने प्रगति की है।
बिहार की विकास यात्रा और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार
सम्राट चौधरी ने उदाहरण देते हुए बताया कि पटना से बेगूसराय, गया और मुजफ्फरपुर जैसे शहर अब डेढ़ से सवा घंटे में पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में आधारभूत संरचना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, और पिछले दो दशकों में राज्य ने काफी तरक्की की है। उन्होंने यह भी बताया कि 2005 से पहले बिहार का बजट बहुत कम था, जबकि झारखंड की आबादी कम होने के बावजूद वहां का 87 प्रतिशत राजस्व बिहार से आता था।
2001 से 2004 के बीच पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बिहार को लगभग 16,000 करोड़ रुपये की सहायता दी। नीतीश कुमार के सत्ता संभालने के बाद बिजली, सड़क और अन्य विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
बाढ़ नियंत्रण और सामाजिक सुधारों पर जोर
बिहार में बाढ़ नियंत्रण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पहले लोग इसे भाग्य का खेल मानते थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। 2008 में 1,92,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जबकि हाल के वर्षों में यह आंकड़ा बढ़कर 6,50,000 क्यूसेक हो गया है। इससे केवल 56 गांव प्रभावित हुए और राहत कार्य तुरंत पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि बिहार अब बदल रहा है और बाढ़ से प्रभावित इलाकों की संख्या में कमी आई है।
सम्राट चौधरी ने शराबबंदी और महिलाओं की सुरक्षा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू है और अब सड़क पर कोई शराबी नजर नहीं आता। महिलाओं के लिए रोजगार और वित्तीय योजनाओं का विस्तार किया गया है, और सबसे अधिक महिला पुलिस की भर्ती भी हुई है। साथ ही, युवाओं और परिवारों के लिए रोजगार सृजन पर भी सरकार का ध्यान केंद्रित है। वर्तमान में राज्य में 22 लाख सरकारी नौकरियों के पद खाली हैं, जिनमें से पिछले पांच वर्षों में 11 लाख से अधिक जॉब्स दी गई हैं।
आर्थिक प्रगति और राजनीतिक अनुभव
सम्राट चौधरी ने अपने वित्त मंत्री के रूप में अनुभव साझा करते हुए कहा कि बिहार की कुल आय लगभग 3,25,000 करोड़ रुपये है, जिसमें से 1,12,000 करोड़ रुपये वेतन पर खर्च होते हैं। उन्होंने बताया कि बिजली सब्सिडी योजना के तहत 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है, जिससे लगभग 1.9 करोड़ परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। यह योजना सभी वर्गों-गरीब, अमीर, दलित, पिछड़े, हिंदू और मुस्लिम-के लिए समान रूप से लागू है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी के लागू होने के बाद बिहार की वित्तीय स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। पहले राज्य को 6000 करोड़ का बजट मिलता था, जो अब बढ़कर लगभग 70,000 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद भी किया, जिन्होंने इस बदलाव में मदद की।
बिहार में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने कहा कि जमीन उपलब्ध कराना और व्यवसाय को आसान बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि 30 दिनों के भीतर उद्योगपति बिहार में निवेश के लिए आएंगे। साथ ही, रूरल रोजगार और महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजनाओं पर भी जोर दिया गया है।
प्रशांत किशोर को दिया जवाब और राजनीतिक अनुभव
प्रशांत किशोर के आरोपों का जवाब देते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि राजनीति में भी कई तरह के जोकर आते हैं, जिनका कोई वजूद नहीं होता। उन्होंने कहा कि वे पिछले 30 वर्षों से बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं और उनका अनुभव इस बात का प्रमाण है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव लड़ने का उनका निर्णय जनता का समर्थन पाने का ही एक तरीका है।
उन्होंने अपने राजनीतिक करियर का जिक्र करते हुए कहा कि आलोचनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि वे धरती के आदमी हैं और बिहार की जनता के बीच ही रहते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे बिहार छोड़ने के बजाय यहां अवसरों का लाभ उठाएं।
अंत में, उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले चुनाव में एनडीए को बहुमत मिलेगा और नई सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बिजली और सड़क जैसे क्षेत्रों में प्रगति जारी है, और अब राज्य धीरे-धीरे स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ रहा है।











