बिहार में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद प्रशासनिक कदम
बिहार राज्य में बर्ड फ्लू (H5N1) के संक्रमण की पुष्टि होने के बाद सरकार ने तुरंत ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पटना के पीसी कॉलोनी, कंकड़बाग के जू-सेक्टर पार्क और पटना हाईकोर्ट परिसर में कौओं और मुर्गियों की अचानक हुई मौत के बाद यह वायरस फैलने की आशंका जताई गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, नमूने जांच के लिए भोपाल (Bhopal) भेजे गए थे। रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र को एक किलोमीटर के दायरे में संक्रमणग्रस्त घोषित कर दिया है। संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए करीब 4575 मुर्गियों को मार डाला गया है, साथ ही 9662 अंडे और 530 किलो चारा भी नष्ट कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, पूरे क्षेत्र में दवाओं का छिड़काव किया गया है।
सावधानी और जांच के कदम उठाए गए
प्रशासन ने जनता से सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की अपील की है। जू प्रशासन ने जू परिसर में पानी, मिट्टी, रक्त और अन्य नमूनों को जांच के लिए भोपाल भेजा था। रिपोर्ट का इंतजार करते हुए, जू में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। पटना जू को 7 मार्च तक बंद कर दिया गया है, जहां पक्षी वार्ड को सैनिटाइज किया जा रहा है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।
बर्ड फ्लू का संक्रमण कैसे फैलता है और इसके लक्षण
बर्ड फ्लू इंसानों में संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क से फैलता है। यदि कोई व्यक्ति बीमार पक्षी को छूता है, या उसकी लार, नाक का स्राव या मल के संपर्क में आता है, तो संक्रमण का खतरा रहता है। इसके अलावा, संक्रमित पक्षियों के पंख फड़फड़ाने या छींकने से वायरस के सूक्ष्म कण हवा में फैल जाते हैं, जो सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
यदि कोई व्यक्ति बर्ड फ्लू से संक्रमित हो जाता है, तो उसे तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। वर्तमान में, बर्ड फ्लू का खतरा भारत के कई राज्यों में बढ़ रहा है, जिससे सतर्कता और जांच जरूरी हो गई है।









