दिल्ली-NCR में त्योहारों के दौरान यात्रा संकट का सामना
हर वर्ष धनतेरस, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के समय दिल्ली-NCR (National Capital Region) में यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। इन त्योहारों के अवसर पर बिहार के प्रवासी अपने घर लौटने के लिए संघर्ष करते हैं, जो उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है। इस दौरान हवाई जहाज के टिकटों की कीमतें आसमान छूने लगती हैं और ट्रेनों में रिजर्वेशन मिलना लगभग असंभव हो जाता है। यह स्थिति भारत की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था में मौजूद गंभीर खामियों को उजागर करती है। बीते दो दशकों में बिहार से NCR की ओर प्रवास में वृद्धि हुई है, लेकिन भारतीय रेलवे ने पटना और दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी में अपेक्षाकृत कम सुधार किया है।
यात्रा व्यवस्था में बढ़ती चुनौतियां और रेलवे का प्रयास
हर साल की तरह इस बार भी यात्रियों को यात्रा के दौरान कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे ने त्योहारों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 763 विशेष ट्रेनों का संचालन किया है, जो कुल 10,782 ट्रिप्स करेंगी। हालांकि, इन ट्रेनों में से अधिकांश पहले से ही पूरी तरह से बुक हो चुकी हैं, जिससे यात्रियों को राहत मिलना मुश्किल है। आरटीआई (RTI) रिपोर्ट के अनुसार 2005 में पटना और दिल्ली के बीच केवल 17 ट्रेनें चलती थीं, जो 2010 में बढ़कर 22 हो गईं। 2015 में यह संख्या 23 और 2019 में 26 हो गई, लेकिन 2025 तक यह संख्या केवल 27 ही रह पाई है। इन ट्रेनों में से अधिकतर वीकली या बाय-वीकली हैं, जो त्योहारों के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को पूरा करने में असमर्थ हैं।
सरकारें बदलीं, लेकिन समस्या जस की तस
आरटीआई रिपोर्ट से पता चलता है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (2004-2014) के कार्यकाल में सात नई ट्रेनों का परिचालन शुरू किया गया था, जिनमें से दो डेली, तीन वीकली और दो बाय-वीकली थीं। इसके बाद के वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (2014-2025) के कार्यकाल में केवल छह नई ट्रेनों का जुड़ाव हुआ, जिनमें से एक डेली, चार वीकली और एक बाय-वीकली है। इन दोनों सरकारों के कार्यकाल में ट्रेनों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई, जबकि प्रवास और यात्रा की मांग लगातार बढ़ती रही। इस स्थिति ने त्योहारों के दौरान घर लौटने की कठिनाई को और भी बढ़ा दिया है।
यात्रा की कठिनाइयों का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
एनसीआर में रहने वाले लाखों प्रवासी परिवारों के लिए यह समस्या केवल यात्रा की असुविधा नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक और आर्थिक बोझ भी बन चुकी है। 25 अक्टूबर तक कोई भी ट्रेन सीट उपलब्ध नहीं है, और दिल्ली से पटना के हवाई टिकटों की कीमतें भी बढ़ गई हैं। इससे कई लोग अपने यात्रा योजनाओं को रद्द करने या उधार लेने पर मजबूर हो गए हैं। साथ ही, बस ऑपरेटर भी मांग का फायदा उठाकर किराए दोगुना कर रहे हैं, खासकर रातभर की लंबी यात्रा के दौरान। जिन प्रवासियों ने NCR की ऊंची इमारतें खड़ी कर इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, उनके लिए छठ जैसे त्योहार पर घर लौटना अब एक विलासिता बन गया है।










