सीमांचल में बिहार चुनाव का महत्त्वपूर्ण मुकाबला
बिहार विधानसभा के दूसरे चरण में कुल 122 सीटों पर मतदान हो रहा है, जिनमें से सीमांचल क्षेत्र की 24 सीटें भी शामिल हैं। यह क्षेत्र 2020 के चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी AIMIM (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) के लिए खास रहा, जब उसने पांच सीटें जीतकर राजनीतिक हलचल मचा दी थी। इस बार भी सीमांचल की 15 सीटों पर AIMIM के उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे यह क्षेत्र फिर से राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।
मुस्लिम वोटों का प्रभाव और राजनीतिक समीकरण
सीमांचल में मुस्लिम आबादी लगभग 47 प्रतिशत है, जो इस क्षेत्र की राजनीतिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। इसी मुस्लिम वोट बैंक का लाभ उठाने के लिए AIMIM और ओवैसी अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस, आरजेडी (RJD), जेडीयू (JDU) और जनसुराज पार्टी भी अपनी सियासी पकड़ मजबूत करने में लगे हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिम वोटों के कारण मुकाबला चार प्रमुख दलों के बीच है, और यह चुनाव केवल बिहार की राजनीति तक सीमित नहीं रहकर राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव डाल सकता है।
सीमांचल की सीटों का राजनीतिक गणित और ओवैसी का प्रभाव
सीमांचल क्षेत्र में किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जिले आते हैं, जहां कुल 24 सीटों पर मतदान हो रहा है। यह क्षेत्र राज्य की कुल 243 सीटों का लगभग 10 प्रतिशत है। इस बार AIMIM ने 25 उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें दो गैर-मुस्लिम भी शामिल हैं। मुस्लिम समुदाय की आबादी यहां 30 से 65 प्रतिशत के बीच है। महागठबंधन की ओर से कांग्रेस 12, आरजेडी 9, वीआईपी 2 और सीपीआईएमएल एक सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि एनडीए (NDA) में बीजेपी 11, जेडीयू 10 और एलजेपी (LJP) 3 सीटों पर चुनावी मैदान में हैं।
2020 के चुनाव में AIMIM ने पांच सीटें जीती थीं, जिनमें अमौर, बहादुरगंज, बायसी, जोकीहाट और कोचाधामन शामिल हैं। उस समय AIMIM के उम्मीदवारों ने कई सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया था। इस बार भी AIMIM के उम्मीदवार सीमांचल में अपनी सियासी ताकत दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मुकाबला पहले से अधिक कठिन हो गया है।











