बिहार विधानसभा चुनाव में नई राजनीतिक समीकरणें और मुकाबले
बिहार विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण के साथ ही राजनीतिक माहौल में तीव्र प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। इस बार कई बड़े नेताओं ने अपने पुराने दलों को छोड़कर नई राजनीतिक दिशा अपनाई है। खासतौर पर पूर्व सांसद सूरजभान सिंह ने पशुपति पारस की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) का साथ छोड़कर अपनी नई राजनीतिक यात्रा शुरू की है। उन्होंने पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर अपने राजनीतिक भविष्य का संकेत दे दिया है। इसके बाद उन्होंने तेजस्वी यादव से मुलाकात कर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का दामन थाम लिया है।
मोकामा सीट पर बाहुबली नेताओं के बीच मुकाबला तेज
सूरजभान सिंह के आरजेडी में शामिल होने के साथ ही मोकामा विधानसभा सीट पर सियासी जंग और भी दिलचस्प हो गई है। इस सीट पर सूरजभान की पत्नी वीणा देवी आरजेडी की उम्मीदवार हैं, जबकि उनके सामने जेडीयू के टिकट पर बाहुबली नेता अनंत सिंह पहले से ही मैदान में हैं। पटना जिले की यह सीट अब सबसे गर्म राजनीतिक क्षेत्र बन गई है, जहां दो बाहुबली नेताओं के बीच सीधी टक्कर होने की संभावना है। अनंत सिंह और वीणा देवी के बीच यह मुकाबला खासा चर्चित हो गया है।
मोकामा सीट का ऐतिहासिक और जातीय समीकरण
मोकामा सीट का राजनीतिक इतिहास जातीय और सामाजिक समीकरणों पर आधारित रहा है। यहां यादव, भूमिहार, कुशवाहा और मुस्लिम वोटरों का वर्चस्व माना जाता है। अनंत सिंह भूमिहार समुदाय से हैं और इस वर्ग में उनकी मजबूत पकड़ है। वहीं, आरजेडी को यादव और मुस्लिम समुदाय का परंपरागत समर्थन प्राप्त है। 1990 के दशक में इस सीट पर सूरजभान सिंह ने अपने समर्थकों के साथ जीत हासिल कर राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया था। अब फिर से वही मुकाबला दोबारा देखने को मिल रहा है, जिसमें दोनों नेताओं की मजबूत पकड़ और वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।










