बिहार में शराबबंदी के 10 साल: सामाजिक और स्वास्थ्य लाभ
बिहार में शराबबंदी की घोषणा को पूरे दस वर्ष हो चुके हैं, जिसके परिणामस्वरूप राज्य के राजस्व में भले ही गिरावट आई हो, लेकिन इसके सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। इस नीति के चलते पुरुषों में शराब का सेवन कम हुआ है, मोटापे की समस्या घट गई है, और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। साथ ही, विवाहित महिलाओं की सुरक्षा में भी सुधार हुआ है। पड़ोसी राज्यों की तुलना में बिहार का प्रदर्शन बेहतर रहा है, जो यह दर्शाता है कि आर्थिक नुकसान के बावजूद शराबबंदी का सामाजिक और स्वास्थ्य स्तर पर प्रभाव लाभकारी रहा है।
शराबबंदी के स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव
शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार में पुरुषों के स्वास्थ्य में सुधार देखा गया है, साथ ही महिलाओं के खिलाफ मानसिक और यौन हिंसा के मामलों में भी गिरावट आई है। अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में शराबबंदी से लगभग 24 लाख पुरुषों के दैनिक या साप्ताहिक शराब सेवन में कमी आई है, वहीं मोटापे के मामलों में करीब 18 लाख की गिरावट दर्ज हुई है। इसके अलावा, घरेलू हिंसा के मामलों में भी लगभग 21 लाख की कमी देखी गई है। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि शराबबंदी ने सामाजिक और पारिवारिक जीवन को बेहतर बनाने में मदद की है।
महिलाओं की सुरक्षा और पारिवारिक स्थिरता
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि शराब का सेवन वैवाहिक जीवन की गुणवत्ता पर गहरा प्रभाव डालता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में 83 प्रतिशत विवाहित महिलाओं ने बताया कि जब उनके पति अक्सर शराब पीते थे, तब उन्हें शारीरिक या भावनात्मक हिंसा का सामना करना पड़ता था। वहीं, जिनके पति शराब नहीं पीते थे, उनमें यह प्रतिशत केवल 34 था। इसका अर्थ है कि शराबबंदी ने महिलाओं की सुरक्षा और पारिवारिक स्थिरता पर मजबूत सकारात्मक प्रभाव डाला है।
बिहार की तुलना में पड़ोसी राज्यों का प्रदर्शन
बिहार में शराबबंदी के कारण घरेलू हिंसा और पुरुषों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ा है, जो पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर रहा है। 2015-16 से 2019-21 के बीच गर्भावस्था के दौरान महिलाओं पर होने वाली हिंसा में बिहार में 2 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह केवल 0.7 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 1.5 प्रतिशत ही घटा है। पुरुषों के स्वास्थ्य की बात करें तो बिहार में हाई ब्लड प्रेशर वाले पुरुषों में केवल 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उत्तर प्रदेश में यह 10.9 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 4 प्रतिशत बढ़ी। डायबिटीज के मामलों में बिहार में 0.1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जबकि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में क्रमशः 0.4 और 0.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिहार में शराबबंदी ने पुरुषों के स्वास्थ्य और महिलाओं की सुरक्षा पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।
निष्कर्ष: सामाजिक और स्वास्थ्य लाभ का महत्व
यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि अत्यधिक शराब पीने को नियंत्रित करने वाली नीतियों का होना आवश्यक है, भले ही शराबबंदी से आर्थिक नुकसान हो सकता है। फिर भी, इन नीतियों के सामाजिक और स्वास्थ्य लाभों का मूल्यांकन करते समय इन पहलुओं को ध्यान में रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिहार की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा में कदम उठाने से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।










