बिहार चुनाव के दूसरे चरण का महत्व और प्रभाव
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदान का आयोजन छोटे राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है। इस चरण में कई ऐसी सीटें हैं जहां इन छोटे दलों का प्रदर्शन परिणामों को बदलने की क्षमता रखता है। मुख्य दलों की रणनीतियों के बीच हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM), विकासशील इंसान पार्टी (VIP), राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) जैसी पार्टियों का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है।
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा का चुनावी दांव-पेंच
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के लिए यह चरण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की यह पार्टी इमामगंज, बाराचट्टी, टिकारी, अत्रि, सिकंदरा और कुटुम्बा जैसी सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इन इलाकों में HAM की मजबूत पकड़ मानी जाती है। इमामगंज से मांझी की बहू दीपा मांझी और बाराचट्टी से उनकी सास ज्योति मांझी मैदान में हैं। पार्टी का मुख्य लक्ष्य इन क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करना और एनडीए के भीतर अपनी भूमिका को स्थिर बनाना है।
विकासशील इंसान पार्टी और अन्य छोटे दलों का रणनीतिक प्रदर्शन
विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के लिए यह चुनावी चरण निर्णायक माना जा रहा है। पार्टी प्रमुख मुकेश सहनी को महागठबंधन ने उपमुख्यमंत्री पद का वादा किया है, जिससे उनका प्रदर्शन सीधे इस पद की संभावना से जुड़ा है। VIP करीब 15 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए प्रयासरत है। सहनी का मुख्य वोट बैंक निषाद समुदाय है, जो बिहार की 36 प्रतिशत आबादी का बड़ा हिस्सा है। यदि VIP इस चरण में अच्छा प्रदर्शन करती है, तो महागठबंधन में उसकी स्थिति और भी मजबूत हो सकती है।
वहीं, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के लिए भी यह चरण महत्वपूर्ण है। उपेंद्र कुशवाहा की यह पार्टी छह सीटों पर चुनाव लड़ रही है और उसका प्रभाव उसकी सीटों से अधिक, उसके वोट विभाजन की क्षमता पर निर्भर करेगा। कुशवाहा समुदाय का प्रभाव कई निर्वाचन क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उनकी पत्नी स्नेहलता सासाराम से चुनाव लड़ रही हैं, और उनकी जीत या हार पार्टी के मनोबल को प्रभावित करेगी।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के लिए भी यह चरण खास है। असदुद्दीन ओवैसी की यह पार्टी सीमांचल क्षेत्र में अपने प्रभाव को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। AIMIM ने 2020 के चुनाव में पांच सीटें जीती थीं और अब वह इन सीटों को दोहराने की कोशिश कर रही है। पार्टी का ध्यान मुस्लिम समुदाय के वोटों को एकजुट कर राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने पर है। AIMIM की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह बिहार की राजनीति में अपनी जगह बना पाती है या नहीं।









