बिहार विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतदान का इतिहास
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में कुल 122 सीटों पर मतदान का प्रतिशत 68.74 रहा, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी अधिक है। इस बार मतदान का यह आंकड़ा न केवल चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है, बल्कि यह स्वतंत्रता के बाद से अब तक का सबसे उच्च मतदान प्रतिशत भी है। इससे पहले 2020 के विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर 58.8 प्रतिशत मतदान हुआ था, यानी इस बार लगभग 10 प्रतिशत अधिक वोटिंग देखी गई है।
वोटिंग में बढ़ोतरी के कारण और ऐतिहासिक संदर्भ
2020 के मुकाबले इस बार मतदान में करीब 9.6 प्रतिशत का उछाल आया है। चुनाव आयोग के अनुसार, 2015 में यह आंकड़ा 58.3 प्रतिशत और 2010 में 53.8 प्रतिशत था। यदि हम पूरे बिहार की बात करें, तो 2020 में कुल 57.29 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार यह आंकड़ा 66.91 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह पहली बार है जब बिहार में इतनी अधिक मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया है। खास बात यह है कि जब भी बिहार में 60 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है, उस समय राजनीतिक स्थिरता और सरकार परिवर्तन का सिलसिला भी देखा गया है।
सीमांचल क्षेत्र में मतदान का रिकॉर्ड और महिलाओं की भागीदारी
बिहार के सीमांचल जिले जैसे कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया में मतदान का स्तर अभूतपूर्व रहा है। सबसे अधिक 78.60 प्रतिशत मतदान कटिहार जिले में हुआ, जबकि किशनगंज में यह आंकड़ा 78 प्रतिशत से ऊपर रहा। पूर्णिया में 76.04 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इन इलाकों में मतदान का यह रिकॉर्ड पिछले चुनावों की तुलना में काफी बढ़ा है। खासतौर पर मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में मतदान का प्रतिशत बढ़ना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा, मतदान में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही है। दूसरे चरण में करीब 71 प्रतिशत महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जबकि पुरुषों का प्रतिशत 62 से अधिक रहा। कुल मिलाकर, बिहार में महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में 8.8 प्रतिशत अधिक मतदान किया है, जो राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।










