बिहार में पहले चरण का मतदान और राजनीतिक माहौल का तापमान
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को निर्धारित है, लेकिन उससे पहले ही राजनीतिक गतिविधियों का तापमान चरम पर पहुंच चुका है। राज्य में राजनीतिक दलों के बीच तीव्र प्रतिस्पर्धा और परिवारवाद की चर्चा के साथ-साथ ‘कट्टा’ और ‘परिवारिक विवाद’ जैसे मुद्दे भी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। इस चुनावी माहौल में एक ओर आरजेडी (RJD) की रैली में बच्चे के विवादित बयान ने पूरे राजनीतिक क्षेत्र को हिला कर रख दिया है, वहीं दूसरी ओर लालू यादव परिवार के दो प्रमुख नेताओं तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव के बीच चल रही राजनीतिक जंग ने भी पूरे राज्य का ध्यान आकर्षित किया है।
समस्तीपुर की रैली में ‘कट्टा’ विवाद और राजनीतिक चर्चा
समस्तीपुर जिले में आरजेडी उम्मीदवार डॉ. एज्या यादव की रैली के दौरान एक बच्चे ने मंच से विवादित टिप्पणी कर दी। उसने कहा, “अभी तो लड़के लठ लेकर घूमते हैं, तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनेंगे तो कट्टा लेकर घूमेंगे।” इस बयान के बाद माहौल गर्म हो गया और भीड़ ने तालियां बजाईं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बिहार में ‘कट्टा’ का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया। मंच पर मौजूद उम्मीदवार ने बच्चे को रोकने की कोशिश नहीं की, जिससे राजनीतिक हलकों में इस बयान की गंभीरता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। यह बयान बिहार के पुराने जंगलराज की याद दिलाने वाला माना जा रहा है, खासकर मुंगेर जैसे जिलों में जहां देसी कट्टों का इस्तेमाल अपराध और अपहरण के मामलों में आम था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी रैलियों में इस मुद्दे को जरूर भुनाएंगे, क्योंकि यह जनता के बीच एक मजबूत संदेश देने का जरिया बन सकता है।
पहले चरण में मतदान का महत्त्व और चुनावी समीकरण
बिहार में पहले चरण में कुल 121 सीटों पर मतदान होगा, जिसमें पिछली बार एनडीए (NDA) ने 59 और महागठबंधन (Mahagathbandhan) ने 61 सीटें जीती थीं। उस समय मुकाबला कड़ा था, और जेडीयू (JDU) के वोट बैंक को चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने नुकसान पहुंचाया था। आंकड़ों के अनुसार, 22 सीटों पर जेडीयू की हार का अंतर एलजेपी के वोटों से कम था। यदि उस समय एलजेपी एनडीए का हिस्सा होती, तो संभवतः पहले चरण में एनडीए करीब 81 सीटें जीत सकता था। इस बार स्थिति बदली हुई है, क्योंकि बीजेपी (BJP), जेडीयू और रामविलास पासवान की एलजेपी एक साथ मैदान में हैं। इस लिहाज से एनडीए का लक्ष्य पहले चरण में 80 से अधिक सीटें जीतना है, ताकि कुल 160 सीटों का आंकड़ा हासिल किया जा सके, जैसा कि अमित शाह का लक्ष्य है।
लालू परिवार में तेजस्वी और तेजप्रताप के बीच ‘महाभारत’
पहले चरण की सबसे हाई-वोल्टेज टक्कर दो सीटों पर देखने को मिल रही है-राघोपुर और महुआ। राघोपुर से आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव मैदान में हैं, जबकि महुआ से उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार मुकाबला परिवारवाद से अधिक परिवारिक टकराव का प्रतीक बन चुका है। तेजस्वी ने महुआ सीट से अपने भाई तेजप्रताप के खिलाफ मुकेश कुमार रौशन को टिकट दिया है, वहीं तेजप्रताप ने राघोपुर में तेजस्वी के खिलाफ प्रेम कुमार यादव को मैदान में उतारा है। इस राजनीतिक जंग ने लालू परिवार को फिर से चर्चा में ला दिया है। तेजप्रताप ने अपने छोटे भाई पर कटाक्ष करते हुए कहा, “महाभारत की रणभूमि में कोई भाई नहीं होता, केवल शत्रु होता है।” वहीं, मां राबड़ी देवी ने कहा, “मैं मां हूं, दोनों बेटों की जीत चाहती हूं।” इस विवाद ने बिहार की राजनीति में परिवारिक विवाद का नया अध्याय जोड़ दिया है, जो पूरे देश के राजनीतिक परिवारों के बीच पुरानी कहानियों को ताजा कर रहा है।











