बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार सूची और विवाद
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने रविवार को अपनी चौथी उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें कुल 60 सीटों पर अपने प्रत्याशियों का चयन किया गया है। हालांकि, टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर गहरा विवाद उत्पन्न हो गया है। वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि टिकट बेचने जैसी गंभीर बातें भी सामने आ रही हैं, जिससे पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है।
कांग्रेस के नेताओं में टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष
बिहार कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लवरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम पर टिकट बेचने के आरोप लगाए हैं। इनमें विधायक शकील अहमद और सांसद पप्पू यादव भी शामिल हैं। इन आरोपों का असर महागठबंधन की राजनीति पर भी पड़ा है, जहां सहयोगी दलों के बीच मतभेद स्पष्ट नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस के सिपहसालारों पर गंभीर आरोप
कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि टिकट वितरण में पैसा और पक्षपात हावी है। पूर्व मंत्री और विधायक मोहम्मद आफाक आलम ने आरोप लगाया है कि पार्टी में विचारधारा की जगह अब पैसा बोल रहा है। उन्होंने कहा कि जिन उम्मीदवारों ने पार्टी के लिए लंबे समय तक काम किया, उन्हें नजरअंदाज कर नए चेहरों को मौका दिया जा रहा है।
आफाक आलम ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के बड़े नेताओं ने टिकट बेचने का काम किया है और क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा कि कई अनुभवी नेताओं का टिकट काट दिया गया है, जिससे क्षेत्र में नाराजगी बढ़ रही है।
आंतरिक कलह और चुनावी रणनीति की खामियां
बिहार कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि पार्टी के रणनीतिकारों ने बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने के बजाय आरजेडी को कमजोर करने पर ध्यान केंद्रित किया। इस रणनीति के कारण पार्टी को सीट शेयरिंग और टिकट वितरण में भारी असमंजस का सामना करना पड़ा है।
स्रोतों का कहना है कि कांग्रेस के सिपहसालारों का मुख्य उद्देश्य बिहार में आरजेडी को निपटाना था, क्योंकि उन्हें लगता था कि आरजेडी ही कांग्रेस का मुख्य प्रतिद्वंद्वी है। इस कारण तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने में भी पार्टी ने रजामंदी नहीं दिखाई, जो अब चुनावी परिणामों पर असर डाल रहा है।









