बिहार चुनाव में आम आदमी पार्टी की रणनीति का मुख्य कारण
बिहार में आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपनी संगठनात्मक मजबूती बनाए रखने और चुनावी मैदान में उतरने के लिए पहली उम्मीदवार सूची जारी की है। इस निर्णय के पीछे मुख्य रूप से प्रशांत किशोर (PK) का प्रभाव माना जा रहा है, जो पार्टी के बिहार अभियान का महत्वपूर्ण कारक बन गया है। बिहार AAP अध्यक्ष राकेश यादव का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बिहार के मतदाताओं को विकल्प आधारित राजनीति का विकल्प दिखाना है।
प्रशांत किशोर का प्रभाव और पार्टी की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, प्रशांत किशोर का प्रभाव ही AAP को बिहार में चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है। संगठन महासचिव संदीप पाठक ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि पार्टी बिहार में चुनाव लड़ेगी, लेकिन उम्मीदवारों की सूची जारी होने से पहले ही संशय की स्थिति बनी हुई थी। एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि प्रशांत किशोर का जन सुराज मॉडल, जो जनता से जुड़ी, साफ-सुथरी और मुद्दा आधारित राजनीति का प्रतीक है, पार्टी के संगठन पर गहरा असर डाल रहा था।
बिहार में चुनाव लड़ने का निर्णय क्यों लिया गया?
एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि 2020 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने बिहार में चुनाव नहीं लड़ा था। बिहार की पार्टी इकाई लगातार कह रही थी कि यदि गोवा, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों में चुनाव लड़ सकते हैं, तो बिहार को क्यों छोड़ा जाए? दरअसल, बिहार में पार्टी का राजनीतिक प्रभाव कम था, जिसके कारण कई नेता और कार्यकर्ता जन सुराज में शामिल हो गए थे। अब जब पार्टी ने 2025 के चुनाव लड़ने का फैसला किया है, तो उन नेताओं को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
बिहार में पार्टी की तैयारी और भविष्य की योजनाएं
राकेश यादव ने स्वीकार किया कि जन सुराज का प्रभाव पार्टी पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि लगभग आधे कार्यकर्ता जो पहले इस आंदोलन में शामिल थे, अब वापस लौटने पर विचार कर रहे हैं। पार्टी को अभी तक करीब 6000 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी स्क्रूटनी चल रही है। जल्द ही दूसरी और तीसरी सूची भी जारी की जाएगी, जिसमें 30 से 40 उम्मीदवार हो सकते हैं।
PK के विचार और पार्टी की राजनीतिक दिशा
राकेश यादव ने स्पष्ट किया कि प्रशांत किशोर का दावा था कि वह बिहार में एक विकल्प राजनीति प्रस्तुत करेंगे, लेकिन वह भी ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का सोच रहे हैं जिन पर दाग हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली और पंजाब में AAP का शासन मॉडल स्कूलों और अस्पतालों पर केंद्रित रहा है, जिसे हमने पहले ही लागू कर दिया है।
आरजेडी और AAP के संबंधों पर प्रभाव
जब राकेश यादव से पूछा गया कि क्या दिल्ली विधानसभा चुनाव में न लड़ने के कारण आरजेडी (RJD) और AAP के बीच संबंध प्रभावित होंगे, तो उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी चुनाव लड़े थे, जहां कांग्रेस जीती। इससे उनके संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ा। उनका कहना है कि वे जहां भी चुनाव लड़ रहे हैं, वहां अपनी शिक्षा और स्वास्थ्य की राजनीति का मॉडल पेश कर रहे हैं। बिहार में भी उनकी एंट्री से मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद है।
आगामी उम्मीदवारों और चुनावी संभावनाएं
बता दें कि AAP को अभी दो से तीन और उम्मीदवारों की सूची जारी करने की उम्मीद है। यह स्पष्ट नहीं है कि पार्टी कांग्रेस समर्थित क्षेत्रों में भी उम्मीदवार उतारेगी या नहीं, लेकिन इतना तय है कि प्रशांत किशोर (PK) का प्रभाव पार्टी को बिहार की राजनीतिक रेस में मजबूती से उतार चुका है।










