ऑस्ट्रेलियाई संसद में बुर्के पर विवाद और राजनीतिक तनाव
ऑस्ट्रेलिया (Australia) की संसद में एक अप्रत्याशित घटना ने पूरे राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। कट्टर दक्षिणपंथी सेनेटर पॉलीन हसन (Pollyne Hanson) ने अचानक काले बुर्के में संसद के ऊपरी सदन में प्रवेश किया, जिससे वहां का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। जैसे ही सदस्यों को पता चला कि अंदर कौन आया है, पूरा सदन शोर और गुस्से से भर गया। हसन लंबे समय से सार्वजनिक स्थानों पर पूरे चेहरे को ढकने वाले वस्त्रों, विशेष रूप से बुर्के, पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रही हैं। जब उन्हें इस मुद्दे पर विधेयक पेश करने की अनुमति नहीं मिली, तो उन्होंने विरोध का यह अनूठा तरीका अपनाया। उनके प्रवेश के साथ ही सदन की कार्यवाही स्थगित हो गई।
सदस्याओं का विरोध और बहस का तीव्र मोड़
हसन के इस कदम के बाद कई सांसदों ने उनके बुर्का हटाने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इस घटना के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। न्यू साउथ वेल्स (New South Wales) की सीनेटर मेहरीन फारूकी (Mehreen Faruqi) ने सीधे आरोप लगाया कि यह हरकत नस्लवाद को बढ़ावा देती है और एक जिम्मेदार प्रतिनिधि को ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया (Western Australia) की स्वतंत्र सांसद फातिमा पाइमन (Fatinah Paiman) ने भी इसे अत्यंत अपमानजनक और शर्मनाक बताया। सरकार की सीनेट लीडर पेनी वोंग (Penny Wong) ने कहा कि यह कदम किसी चुने हुए सीनेटर की गरिमा के अनुरूप नहीं है और यदि वे अपने कपड़े नहीं हटाते हैं, तो उन्हें सदन से निलंबित कर दिया जाना चाहिए।
बयान और राजनीतिक संदर्भ
घटना के बाद अपने फेसबुक पोस्ट में हसन ने कहा कि यह उनका विरोध दर्ज कराने का तरीका था, क्योंकि सदन ने उनके बिल पर विचार करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि यदि सदन नहीं चाहता कि वह बुर्का पहने, तो फिर बुर्के पर प्रतिबंध ही लगा दिया जाए। यह मामला केवल एक कपड़ा पहनने का नहीं था, बल्कि यह ऑस्ट्रेलिया (Australia) में बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण, पहचान की राजनीति और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चल रही बहस का एक तेज संकेत था।
पॉलीन हसन का राजनीतिक सफर और विचारधारा
पॉलीन हसन (Pollyne Hanson) दशकों से ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में एक विवादास्पद हस्ती रही हैं। उनकी पार्टी वन नेशन (One Nation) वर्तमान में सीनेट (Senate) में चार सीटें रखती है, और मई के आम चुनाव में दो और सीटें जीतने के बाद उनकी स्थिति मजबूत हुई है। उनकी पार्टी का उदय मुख्य रूप से दक्षिणपंथी और आव्रजन-विरोधी विचारधारा के समर्थन से हुआ है। हसन पहली बार 1990 के दशक में राष्ट्रीय स्तर पर जानी गईं, जब उन्होंने एशिया से आने वाले आप्रवासन के खिलाफ मुखर रुख अपनाया। उन्होंने उस समय तर्क दिया था कि ऑस्ट्रेलिया पर “एशियाई लोगों की बाढ़ आने का खतरा” मंडरा रहा है। लंबे समय से उन्होंने बहुसंस्कृतिवाद की आलोचना की है और कड़े आप्रवासन नियंत्रणों का समर्थन किया है।











