बीजेपी से आर.के. सिंह का इस्तीफा और राजनीतिक हलचल
पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्राथमिक सदस्यता से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम पार्टी द्वारा जारी किए गए सस्पेंशन और शो-कॉज़ नोटिस के बाद आया है। सिंह ने इस संदर्भ में राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को एक विस्तृत पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अपने निर्णय और वर्तमान स्थिति का विस्तार से उल्लेख किया है।
सस्पेंशन और शो-कॉज़ नोटिस का कारण
पत्र में आर.के. सिंह ने बताया कि उन्हें मीडिया के माध्यम से पता चला कि पार्टी ने उनके खिलाफ सस्पेंशन और शो-कॉज़ नोटिस जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन आरोपों का कोई विवरण पत्र में नहीं दिया गया है, जिससे उनका सही तरीके से जवाब देना संभव नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पहले ही राज्य BJP कार्यालय को अपना जवाब भेज दिया है।
क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले व्यक्तियों को टिकट देने का विरोध
आर.के. सिंह ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि उनका बयान क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के खिलाफ था। उनका तर्क है कि यह कदम पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि देश और समाज के हित में उठाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ सदस्य राजनीति में अपराधीकरण को रोकने के प्रयासों का विरोध कर रहे हैं।
पत्र के अंत में सिंह ने लिखा, “मैं यहां से बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं।” उनका यह निर्णय राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इस इस्तीफे के बाद पार्टी के प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि सिंह की स्थिति और उनके कारणों का आकलन अब पार्टी नेतृत्व द्वारा किया जाएगा।
चुनाव के बाद पार्टी ने विद्रोहियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए ‘एंटी-पार्टी गतिविधियों’ और संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन करने के आरोप में कई नेताओं को निलंबित कर दिया है। इनमें एमएलसी अशोक कुमार अग्रवाल और कटिहार की मेयर उषा अग्रवाल भी शामिल हैं। सिंह को एक सप्ताह के भीतर अपना औपचारिक जवाब देने का निर्देश दिया गया था।









