लालू यादव का नीतीश कुमार के प्रति रुख में बदलाव
राजनीति के क्षेत्र में लालू यादव ने अपने पहले के रवैये को पूरी तरह से बदलते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब वे नीतीश कुमार के साथ कोई गठबंधन नहीं करेंगे। पहले लालू यादव का मानना था कि उनके लिए नीतीश का दरवाजा सदैव खुला रहेगा, लेकिन अब उन्होंने इस धारणा को त्याग दिया है। उन्होंने अपने ताजा बयान में कहा है कि अब वे नीतीश कुमार से संपर्क नहीं रखेंगे और उनके साथ कोई गठबंधन नहीं किया जाएगा।
यह बदलाव तब आया जब लालू यादव ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक इंटरव्यू में अपने नए रुख का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि अब उनका नीतीश के साथ कोई संबंध नहीं है और यह संकेत भी दिया कि उनके मन में अब कोई उम्मीद नहीं बची है। यह स्थिति उस समय उत्पन्न हुई जब 2022 में नीतीश कुमार ने महागठबंधन छोड़कर एनडीए का हिस्सा बनने का फैसला किया था।
पार्टी और व्यक्तिगत संबंधों में उतार-चढ़ाव
लालू यादव और नीतीश कुमार की दोस्ती का इतिहास तीन दशकों से भी अधिक पुराना है, जिसमें कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। दोनों नेताओं के बीच का संबंध कभी बहुत मजबूत था, लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव आया। लालू यादव ने अपने पुराने बयान में कहा था कि उनके दरवाजे नीतीश के लिए खुले हैं, और यदि वे फिर से मिलना चाहें तो वे स्वागत करेंगे।
हालांकि, तेजस्वी यादव ने अपने बयान में साफ कर दिया है कि अब उनके पिता लालू यादव नीतीश कुमार को फिर से साथ नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि नीतीश की बार-बार की गलतियों के कारण अब उनके साथ कोई समझौता संभव नहीं है। इस तरह के बयान यह संकेत देते हैं कि पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद हैं।
क्या तेजस्वी यादव का स्टैंड लालू यादव के बयान का समर्थन है?
बिल्कुल, तेजस्वी यादव का वर्तमान रुख पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वह अपने फैसले खुद ले रहे हैं और उनके निर्णयों में तेजस्वी की भूमिका प्रमुख मानी जा रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि तेजस्वी यादव अपने भरोसेमंद सलाहकार संजय यादव के सुझावों पर अधिक निर्भर हैं, जिनको तेज प्रताप यादव ‘जयचंदवा’ कहकर संबोधित कर चुके हैं।
यह स्थिति तब और स्पष्ट हो जाती है जब नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक सफर में बार-बार अपने ही गठबंधन और विपक्षी दलों के प्रति अपनी राय बदली है। उन्होंने अपने ही सहयोगियों पर भी आरोप लगाए हैं कि उन्होंने ही उन्हें महागठबंधन छोड़ने के लिए प्रेरित किया। इस तरह, लालू यादव का यह कदम न केवल व्यक्तिगत बल्कि राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा प्रतीत होता है।










