बिहार विधानसभा चुनाव का दूसरा चरण निर्णायक मोड़ पर
बिहार विधानसभा चुनाव का अंतिम और निर्णायक चरण अब शुरू हो चुका है, जिसमें कुल 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान होना है। इस महत्वपूर्ण फेज में लगभग 1302 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाएंगे, जबकि करीब 3 करोड़ 70 लाख 13 हजार 556 मतदाता अपने वोट का प्रयोग करेंगे। यह चुनावी चरण बिहार की नई सरकार के गठन का फैसला करेगा।
क्षेत्रीय विविधता और चुनावी मुकाबला
इस चरण में मिथिलांचल से लेकर सीमांचल, चंपारण बेल्ट, शाहाबाद और मगध क्षेत्र की सीटें शामिल हैं। इन 122 सीटों में से 101 सामान्य हैं, जबकि 19 अनुसूचित जाति और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। 2020 के चुनाव परिणामों के आधार पर इस बार एनडीए के लिए चुनौती अधिक है। बिहार विधानसभा चुनाव के इस दूसरे चरण में एनडीए की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, वहीं महागठबंधन की वापसी का दारोमदार भी इन सीटों पर टिका है। असदुद्दीन ओवैसी, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियों के साथ-साथ कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है।
कौन लड़ रहा है और क्या है मुकाबला?
इस चरण में जिन 122 सीटों पर मतदान हो रहा है, उनमें एनडीए की ओर से बीजेपी 53 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि जेडीयू 44 सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रही है। हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतनराम मांझी अपने कोटे की सभी 6 सीटों पर मैदान में हैं। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम 4 सीटों पर और एलजेपी (आर) 15 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, महागठबंधन की ओर से आरजेडी 71 सीटों पर चुनावी मैदान में है, जबकि कांग्रेस 37 सीटों पर अपनी ताकत दिखा रही है। इसके अलावा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम 21 सीटों पर उम्मीदवार उतार चुकी है, और प्रशांत किशोर की पार्टी 120 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।











