दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का कहर फिर से बढ़ा
ठंड के मौसम के साथ ही दिल्ली और एनसीआर (National Capital Region) में वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राजधानी के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज हुआ है। आनंद विहार में AQI 332, चांदनी चौक में 354 और आईटीओ (ITO) क्षेत्र में 337 पहुंच गया है, जो दर्शाता है कि प्रदूषण का स्तर अत्यधिक खतरनाक है।
राजधानी में प्रदूषण का प्रभाव और प्रशासनिक चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली का वायु प्रदूषण संकट अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही का भी परीक्षा है। जनता जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर है, जबकि सरकार की ओर से उठाए गए कदम अभी तक प्रभावी नहीं दिख रहे हैं। राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ गए हैं।
अक्षरधाम, लोदी रोड और आसपास के इलाकों की स्थिति
अक्षरधाम क्षेत्र के आस-पास की हवा भी अब जहरीली हो चुकी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, यहां का AQI 329 है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं, लोदी रोड, AIIMS (All India Institute of Medical Sciences) और सफदरजंग अस्पताल के आसपास की हवा की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हो रहा है। इन इलाकों का AQI 222 दर्ज किया गया है, जो ‘खराब’ श्रेणी में है।
प्रदूषण का असर और जनता की प्रतिक्रिया
सुबह की सैर पर निकले लोग अब प्रदूषण के प्रभाव को महसूस कर रहे हैं। कर्तव्य पथ पर साइक्लिंग कर रहे प्रदीप तिवारी ने कहा कि हवा की गुणवत्ता हर दिन बदलती रहती है, लेकिन समाधान अभी तक नहीं निकला है। उन्होंने बताया कि कभी हवा थोड़ी साफ रहती है, तो कभी बहुत खराब हो जाती है। कल की तुलना में आज स्थिति और भी खराब है, जिससे उनकी आंखों में पानी आ रहा है और जलन हो रही है।
प्रदीप ने बताया कि दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) का प्रयास किया था, लेकिन वह असफल रहा। उन्होंने कहा कि किसानों का भी इसमें योगदान है, लेकिन जनता को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे मास्क का प्रयोग करें और अपनी सेहत का ध्यान रखें, क्योंकि यह हवा न तो हमारे लिए अच्छी है और न ही किसी और के लिए।









