मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने फिल्म ‘हक़’ पर रोक लगाने की याचिका खारिज की
मध्य प्रदेश के इंदौर उच्च न्यायालय ने फिल्म ‘हक़’ (Haq) की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका को अस्वीकार कर दिया है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिका पूरी तरह से निराधार है और इसमें कोई भी मजबूत आधार नहीं है।
जस्टिस प्रणय वर्मा की बेंच ने 4 नवंबर को इस निर्णय का आदेश पारित किया, जिसके बाद गुरुवार को इसकी प्रति जारी कर दी गई। इससे 7 नवंबर को फिल्म की रिलीज का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह फिल्म यामी गौतम धर और इमरान हाशमी की मुख्य भूमिका में है और 1985 के शाह बानो बेगम भरण-पोषण मामले से प्रेरित है। इस ऐतिहासिक केस के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता पाने का अधिकार सुनिश्चित किया था।
शाह बानो केस और फिल्म का विवाद
शाह बानो बेगम (1992 में निधन) की बेटी सिद्दीका बेगम खान ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि फिल्म उनके परिवार की सहमति के बिना बनाई गई है और इसमें उनकी दिवंगत मां के व्यक्तिगत जीवन के पहलुओं को गलत तरीके से दिखाया गया है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि फिल्म में उनके परिवार की निजता का उल्लंघन हुआ है। इस विवाद के बीच, हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति वर्मा ने अपने आदेश में कहा कि याचिका में कोई भी मजबूत तर्क नहीं है और यह न्यायालय के विचार में कोई आधार नहीं रखती।
शाह बानो मामला और उसकी ऐतिहासिक भूमिका
शाह बानो ने 1978 में अपने वकील पति मोहम्मद अहमद खान से तलाक के बाद गुजारा भत्ता की मांग की थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 1985 में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम महिलाएं भी कानून के तहत गुजारा भत्ता पाने का अधिकार रखती हैं।
इसके बाद 1986 में तत्कालीन सरकार ने मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम पारित किया, जिसने शाह बानो के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद, फिल्म के निर्माता और उनके वकीलों ने इसे रचनात्मक स्वतंत्रता की जीत बताया है।










