उत्तराखंड में रजत जयंती समारोह का भव्य आयोजन
उत्तराखंड के स्थापना के पच्चीस वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आवास पर देशभर के प्रमुख संतों का सम्मानपूर्वक स्वागत किया। इस खास अवसर पर प्रदेश में एक अद्भुत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला। इस कार्यक्रम में बागेश्वर धाम सरकार के आचार्य धीरेंद्र शास्त्री, स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज और परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद सरस्वती जैसे कई प्रतिष्ठित संत मौजूद रहे।
संतों ने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की सराहना की
मुख्यमंत्री धामी ने सभी संतों का सम्मान के साथ स्वागत किया और कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और इसकी पहचान उसकी आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक परंपराओं से है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार इन विरासतों को संरक्षित और विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। संतों ने भी उत्तराखंड सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की और मुख्यमंत्री को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
संत समाज ने धर्म और संस्कृति के संरक्षण पर बल दिया
कार्यक्रम में मौजूद संतों ने उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान को मजबूत बनाए रखने और धर्म-संरक्षण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को एकजुट करने और उसकी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने का संदेश देते हैं। साथ ही, उन्होंने प्रदेश और जनता के कल्याण की कामना भी की। इस तरह के कार्यक्रम समाज में एकता और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देते हैं, जो राज्य की समृद्ध परंपराओं को जीवित रखने में मददगार हैं।











