मध्यप्रदेश में सड़क सुरक्षा के लिए हेलमेट अनिवार्यता का कड़ा अभियान शुरू
मध्यप्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और मौतों को देखते हुए आज से पूरे प्रदेश में हेलमेट पहनने को अनिवार्य बनाने का विशेष अभियान शुरू किया गया है। इस नई पहल के तहत न केवल दोपहिया वाहन चलाने वालों को बल्कि पीछे बैठने वाले यात्रियों को भी हेलमेट पहनना जरूरी होगा।
राज्य पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार 6 नवंबर से यह अभियान प्रभावी हो गया है। इस दौरान ट्रैफिक पुलिस हेलमेट न पहनने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। पुलिस का कहना है कि यह अभियान केवल चालान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनता में जागरूकता फैलाने पर भी जोर दिया जाएगा।
विशेष जिलों में सख्ती और सड़क दुर्घटना आंकड़ों का विश्लेषण
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे पांच जिलों में इस अभियान को लेकर विशेष सख्ती बरती जाएगी। इन जिलों में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों का प्रतिशत सबसे अधिक है, जो कुल मौतों का 58 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार, 2024 में प्रदेशभर में लगभग 14,791 लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में गई है।
इंदौर में 2,425 और ग्रामीण क्षेत्रों में 290 मौतें हुई हैं, जबकि भोपाल में शहर में 945 और ग्रामीण इलाकों में 235 मौतें दर्ज हुई हैं। जबलपुर में 2,035, उज्जैन में 1,536 और ग्वालियर में 1,049 मौतें हुई हैं। इन पांच जिलों में कुल 8,515 लोगों की जान गई है, जो प्रदेश की कुल मौतों का 58 प्रतिशत हिस्सा है।
दंड और जागरूकता के साथ सड़क सुरक्षा का नया दृष्टिकोण
यदि किसी दोपहिया वाहन पर एक व्यक्ति हेलमेट पहना है और दूसरा नहीं, तो दोनों पर 300 रुपये का चालान लगेगा। यदि दोनों ने हेलमेट नहीं पहना है, तो जुर्माना बढ़कर 500 रुपये हो जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य न केवल नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करना है, बल्कि जनता में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी फैलाना है।
यह कदम सड़क दुर्घटना रोकने और लोगों की जान बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जो प्रदेश में सड़क सुरक्षा के मानकों को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।











