नाइजीरिया में ईसाई समुदाय पर बढ़ता खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को नाइजीरिया को विशेष चिंता का देश घोषित किया है, जहां ईसाई समुदाय के अस्तित्व को गंभीर खतरा महसूस हो रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मुस्लिम और ईसाई समुदायों के बीच हो रही हिंसा का जिक्र किया और आरोप लगाया कि कट्टरपंथी इस्लामवादी समूह नाइजीरिया में ईसाई अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न कर रहे हैं।
देश में हो रही हिंसा के कारण हजारों ईसाई मारे जा रहे हैं, और इस नरसंहार के लिए मुख्य रूप से कट्टरपंथी इस्लामवादी समूह जिम्मेदार हैं। ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि नाइजीरिया में ईसाई समुदाय का अस्तित्व खतरे में है और यह स्थिति विश्वभर में चिंता का विषय बन चुकी है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और कार्रवाई की मांग
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और उन्होंने कांग्रेसमैन रिले मूर, चेयरमैन टॉम कोल और हाउस एप्रोप्रिएशन्स कमेटी से तुरंत इस मुद्दे की जांच करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अनुरोध किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस तरह के अत्याचारों पर चुप नहीं बैठेगा। हम अपनी महान ईसाई आबादी को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह से तैयार, इच्छुक और सक्षम हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि दुनिया भर में ईसाई समुदाय पर हो रहे अत्याचारों को नजरअंदाज किया गया, तो अमेरिका अपने कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
हाल की घटनाएं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, जून में नाइजीरियाई बिशप के अपने गांव पर हुए आतंकवादी हमले में बीस से अधिक लोग मारे गए थे। यह घटना उस समय हुई जब बिशप ने अमेरिकी कांग्रेस के सामने ईसाई समुदाय के उत्पीड़न का जिक्र किया था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नियुक्त राजदूत मार्क वॉकर ने कहा कि बढ़ती हिंसा को देखते हुए अमेरिका को नाइजीरिया पर दबाव बढ़ाना चाहिए। इस संदर्भ में, अमेरिका का मानना है कि नाइजीरिया में हो रहे धार्मिक अत्याचारों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई जरूरी है।











