महाराष्ट्र में किसान आंदोलन का उग्र रूप
महाराष्ट्र में किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे राज्य में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गर्म हो गया है। पूर्व मंत्री बच्चू कडू के नेतृत्व में चल रहे ‘महाअल्गार मोर्चा’ ने नागपुर-हैदराबाद राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) को जाम कर दिया है। इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर शरद पवार गुट की एनसीपी, किसान सभा और राजू शेट्टी की पार्टी का समर्थन प्राप्त है।
मुख्य किसान मांगे और आंदोलन की स्थिति
किसान संगठनों की प्रमुख मांगों में सम्पूर्ण कर्ज माफी, असमय बारिश से फसलों को हुए नुकसान की त्वरित भरपाई, फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का निर्धारण और दिव्यांग किसानों को छह हजार रुपये मासिक भत्ता शामिल हैं। इस जाम के कारण यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चू कडू ने सरकार को नागपुर में वार्ता के लिए अल्टीमेटम दिया है, साथ ही मुंबई में भी मंत्रियों से बातचीत के कई प्रस्ताव ठुकराए हैं।
किसानों का दर्द और सरकार की प्रतिक्रिया
फसल बर्बाद होने से किसान अत्यंत दुखी हैं। लातूर के किसान सुरेश चौहान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें वे अपनी बर्बाद हुई सोयाबीन की फसल देखकर फूट-फूट कर रो रहे हैं। दो दिनों की भारी बारिश और बाढ़ ने उनके खेतों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। चौहान ने बताया कि राहत राशि अभी तक नहीं मिली है, जिससे उनका परिवार दीपावली भी नहीं मना सका। इसी बीच, परभणी में गुस्साए किसानों ने जिला कलेक्टर की कार पर पथराव किया है, जिसमें एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सरकार किसानों की पीड़ा को समझती है और अब तक 32,000 करोड़ रुपये का राहत पैकेज वितरित किया जा चुका है। उन्होंने आंदोलनकारियों से अपील की है कि वे जनता का जीवन बाधित न करें और संवाद के माध्यम से समाधान खोजें। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसानों का कर्ज माफ करना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक सहायता पहुंचाना है, खासकर उन किसानों के लिए जिनकी जमीनें और फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। राज्य के 29 जिलों में लगभग 68 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें नष्ट हुई हैं, जो आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गई है।











