आंध्र प्रदेश में भयंकर चक्रवाती तूफान का प्रभाव
आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र में चक्रवात मोंथा का लैंडफॉल शुरू हो चुका है, जिससे भारी तबाही का खतरा मंडरा रहा है। इस तूफान के कारण कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो रही है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। कोनासीमा जिले के मकानगुडेम गांव में तेज आंधी के कारण एक पेड़ गिरने से एक महिला की मौत हो गई, जो इस प्राकृतिक आपदा की भयावहता को दर्शाता है। नेल्लोर जिले में भी पिछले 36 घंटों से लगातार बारिश जारी है, और मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 12 घंटों में भीषण बारिश का दौर जारी रहेगा। समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठने लगी हैं, जो तटीय इलाकों के लिए खतरे की घंटी है।
झारखंड और ओडिशा में भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाएं
प्रचंड चक्रवात मोंथा के कारण झारखंड के कई जिलों में भारी बारिश का सिलसिला जारी है। राजधानी रांची में दोपहर के समय तेज बारिश ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, 30 अक्टूबर तक झारखंड के विभिन्न जिलों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। इसी तरह, ओडिशा के तटीय और दक्षिणी जिलों में भीषण तूफान के कारण भारी बारिश हुई है, जिससे भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं। गजपति जिले में भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं, वहीं रायगढ़ जिले के गुनुपुर, गुदारी और रामनागुड़ा इलाकों में पेड़ उखड़ गए हैं। इन प्राकृतिक आपदाओं से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
सुरक्षा के लिए तटीय इलाकों में तैनाती और बंदिशें
ओडिशा में चक्रवात के प्रभाव को देखते हुए 153 बचाव टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें 6,000 से अधिक कर्मी शामिल हैं। इन टीमों ने 2000 से अधिक चक्रवात आश्रय स्थल स्थापित किए हैं, ताकि आपदा के समय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, प्रभावित जिलों में स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और सरकारी कार्यालयों को 30 अक्टूबर तक बंद कर दिया गया है। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी आपदा के मद्देनजर स्कूलों को बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके अलावा, विशाखापत्तनम हवाई अड्डे से संचालित 32 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, और दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) ने 120 ट्रेनों को निरस्त कर दिया है। इन कदमों का उद्देश्य आपदा से निपटने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।











