वाराणसी में साइबर गिरोह का पर्दाफाश: फर्जी फ्रेंचाइजी के नाम पर लाखों की ठगी
वाराणसी पुलिस ने एक जालसाजी गिरोह का खुलासा किया है, जो बड़ी कंपनियों की नकली फ्रेंचाइजी दिलाने के बहाने लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर रहा था। इस गिरोह के दो सदस्यों को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। ये अपराधी गूगल (Google) और मेटा (Meta) जैसे प्लेटफार्मों पर फर्जी विज्ञापन चलाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। पुलिस ने इनके पास से 14 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, तीन सिम कार्ड, चार नकली दस्तावेज, दो वाई-फाई राउटर और लगभग 54,500 रुपये नकद भी बरामद किए हैं।
मामले का खुलासा और गिरफ्तारी
यह मामला तब उजागर हुआ जब रोहनिया थाना क्षेत्र के निवासी आयुष कुमार ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें ZEPTO कंपनी की फर्जी फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर 20 लाख 16 हजार 500 रुपये की धोखाधड़ी हुई है। इस शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस ने धारा 318(4) बीएनएस और 66D आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। इस गंभीर मामले की जांच के लिए डीसीपी अपराध सर्वण टी. के नेतृत्व में दो टीमों का गठन किया गया।
गिरोह का नेटवर्क और जांच प्रक्रिया
पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर जांच की और गिरोह के सरगना समेत दो मुख्य अपराधियों को झारखंड के जमशेदपुर (Jamshedpur) और बिहार के नालंदा (Nalanda) से गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह प्रतिष्ठित कंपनियों जैसे ZEPTO, BLINKIT, VOLMO, AMUL DAIRY, DHANI FINANCE और ZUDIO की नकली वेबसाइटें बनाता था। ये वेबसाइटें गूगल और मेटा पर चलाए गए विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को आकर्षित करती थीं। जब कोई व्यक्ति इन कंपनियों के नाम से सर्च करता, तो ये नकली वेबसाइटें पहले दिखती थीं, जिससे लोग धोखे में आकर अपनी व्यक्तिगत जानकारी दे देते। इसके बाद गिरोह फर्जी कॉल, इनवॉइस और इनटेंट लेटर भेजकर रजिस्ट्रेशन फीस और सिक्योरिटी मनी के नाम पर लाखों रुपये हड़प लेते थे। पुलिस अब बाकी सदस्यों की तलाश कर रही है और बैंक खातों की जांच कर रही है ताकि धोखाधड़ी की रकम का पूरा पता लगाया जा सके।











