AIIMS भोपाल में मानवता की मिसाल: अंगदान से जीवनदान
AIIMS (All India Institute of Medical Sciences) भोपाल ने एक बार फिर मानवता और परोपकार का उदाहरण स्थापित किया है। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद अस्पताल में भर्ती 37 वर्षीय मरीज का निधन हो गया, लेकिन उसके परिजनों ने उसकी इच्छा के अनुसार अंगदान करने का निर्णय लिया। इस निर्णय के परिणामस्वरूप पांच मरीजों को नई जिंदगी मिली है।
सफलता के साथ हुआ अंग प्रत्यारोपण
मरीज का हृदय 41 वर्षीय मरीज में ट्रांसप्लांट किया गया, जो कि AIIMS भोपाल का तीसरा सफल हार्ट ट्रांसप्लांट था। वर्तमान में प्राप्तकर्ता ICU में हैं और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, एक किडनी का ट्रांसप्लांट 30 वर्षीय मरीज में किया गया है, जबकि दूसरी किडनी को शहर के बंसल अस्पताल भेजा गया है। साथ ही, दो कॉर्निया से दो मरीजों को दृष्टि प्रदान की जाएगी।
अंगदान के महत्व और प्रक्रिया
यह मामला मेडिकोलीगल था, इसलिए मृत्यु के कारण की पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम आवश्यक था। AIIMS भोपाल के इतिहास में यह दूसरी बार था जब पोस्टमार्टम सीधे ऑपरेशन थियेटर (OT) में किया गया। अंगदान के बाद भोपाल के पुलिस दल और अस्पताल की ओर से ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशानुसार, यह भावुक क्षण समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता और सम्मान का प्रतीक बन गया।











