यमुना नदी में प्रदूषण और राजनीतिक विवाद
दिल्ली में छठ पूजा के दौरान यमुना नदी के प्रदूषण को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच तीखी टकराव देखने को मिल रही है। AAP का तर्क है कि यमुना का पानी इतना प्रदूषित है कि इसे नहाने के योग्य भी नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, जल मंत्री परवेश वर्मा ने दावा किया है कि नदी का पानी पहले की तुलना में अब अधिक स्वच्छ हो चुका है।
छठ घाट का निरीक्षण और राजनीतिक बयानबाजी
दिल्ली सरकार के जल मंत्री परवेश वर्मा ने बिरला मंदिर छठ घाट का निरीक्षण किया, जिसमें सांसद बांसुरी स्वराज भी मौजूद थीं। मीडिया से बातचीत के दौरान वर्मा ने सौरभ भारद्वाज के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, “पहले की सरकारें त्योहारों के दौरान राजनीति करती थीं, लेकिन हमने हजारों छठ घाट बनाए हैं और उनका पूरा खर्च दिल्ली सरकार ही उठा रही है।” उन्होंने यह भी कहा कि, “9 अक्टूबर को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने यमुना का सैंपल लिया था, और अब का पानी पहले से काफी बेहतर है।” वर्मा ने यह भी बताया कि छठ घाट पर आने वाली महिलाएं खुद कह रही हैं कि पानी पहले से अधिक साफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया था कि सात महीनों में यमुना पूरी तरह साफ हो जाएगी, लेकिन उन्होंने ईमानदारी से प्रयास किए हैं और इसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण में सुधार और जनता का समर्थन
परवेश वर्मा का मानना है कि दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वच्छता और जल गुणवत्ता सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनके परिणाम अब दिखने लगे हैं। जनता भी इन प्रयासों का समर्थन कर रही है, और छठ जैसे त्योहारों के दौरान नदी की स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ी है। यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी हैं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी सम्मान देते हैं।









