भाई दूज का त्योहार और इसकी पौराणिक कथा
हर वर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष यह शुभ अवसर 23 अक्टूबर को गुरुवार के दिन मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत कथा का पाठ करने से अत्यधिक पुण्य प्राप्त होता है। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक माना जाता है, जो भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है।
यमराज और यमुना की पौराणिक कथा
प्राचीन काल की बात है, जब यमराज को अपनी बहन यमुना की बहुत याद आई। उन्होंने अपने दूतों को भेजकर यमुना को खोजने का आदेश दिया, लेकिन वे असफल रहे। अंततः कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज की मुलाकात यमुना जी से हुई। बहन को देखकर यमराज बहुत प्रसन्न हुए और उनका आदरपूर्वक स्वागत किया। यमुना जी ने अपने भाई का सत्कार किया और भोजन कराया। इस प्रेमपूर्ण मिलन से यमराज भी बहुत खुश हुए।
यमराज का वरदान और परंपरा
खुश होकर यमराज ने बहन से कहा, “भाई, जो भी तुमसे मांगोगे, मैं तुम्हें दूंगा।” यमुना जी ने विनम्रता से कहा, “भैया, मुझे ऐसा वरदान दो कि जो भी मेरे जल में स्नान करे, उसे यमलोक की यातनाएं न सहनी पड़े।” यमराज ने यह वरदान स्वीकार किया। तभी से इस दिन को “यम द्वितीया” कहा जाने लगा। इस दिन यमराज ने अपने वचन के अनुसार, यमलोक के जीवों को यातना से मुक्ति दी और उत्सव मनाया गया।
भाई दूज का धार्मिक और सामाजिक महत्व
यमराज की बहन के प्रति प्रेम और उनके कल्याण की भावना देखकर, उन्होंने कहा कि जो भाई अपनी बहन का सम्मान करेगा, उसे यमपाश में बांधकर यमपुरी ले जाया जाएगा। लेकिन यदि वह बहन के जल में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देगा, तो उसे स्वर्ग का सुख प्राप्त होगा। इस परंपरा के अनुसार, इस दिन भाई अपनी बहनों से मिलते हैं, उन्हें तिलक लगाते हैं और उपहार या दक्षिणा देते हैं।
मत्स्य पुराण में उल्लेख और ब्रज का विशेष महत्व
मत्स्य पुराण के अनुसार, इस दिन यमराज की पूजा करने से मृत्यु का भय दूर होता है और पापों से मुक्ति मिलती है। ब्रज क्षेत्र में इस त्योहार का विशेष महत्व है, जहां बहनें यमुना नदी में स्नान करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन बहनों को दक्षिणा और उपहार देने से शत्रु भय, अकाल मृत्यु और जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं। साथ ही, धन, ऐश्वर्य, बल और बुद्धि की प्राप्ति होती है।
दीपदान और त्योहार का संपूर्ण महत्व
शाम के समय घर के बाहर यमराज के नाम से चार दीपक जलाना चाहिए। यह दीपक घर में सुख, शांति और समृद्धि लाने का प्रतीक है। भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक है। यह दिन हमें सिखाता है कि यदि भाई-बहन एक-दूसरे का सम्मान और प्यार करें, तो जीवन में खुशियों, समृद्धि और आशीर्वाद का वास बना रहता है।











