भाई दूज का त्योहार और उसकी परंपराएं
भाई दूज का त्योहार सनातन संस्कृति में भाई-बहन के अटूट संबंध का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से भाई-बहनों के बीच प्रेम और सुरक्षा का संदेश फैलाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने गए थे, जिन्होंने उनका स्वागत कर तिलक किया। तभी से यह पर्व भाई दूज या यम द्वितीया के रूप में मनाया जाने लगा है।
दूर बैठे भाई के लिए तिलक करने की आसान विधि
यदि आपका भाई किसी कारणवश घर पर नहीं है, तो भी आप अपने प्रेम और शुभकामनाओं को व्यक्त कर सकते हैं। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। अपने सभी भाइयों के नाम से एक-एक नारियल बाजार से खरीदें। घर के मंदिर या पूजा स्थान पर एक छोटी सी चौकी रखें और उस पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।
चौकी पर हल्दी या कुमकुम से अष्टदल कमल का चित्र बनाएं और हर भाई के नाम का नारियल उस पर स्थापित करें। नारियल पर रोली और चावल से तिलक करें। इसके बाद फूल, फल और मिठाई अर्पित करें और दीपक जलाकर आरती करें। पूजा समाप्त होने के बाद नारियल को पीले कपड़े में लपेटकर सुरक्षित स्थान पर रख दें। इस विधि से की गई पूजा भी वही फल देती है, जो सामने बैठकर तिलक करने से मिलता है।
सही समय पर करें तिलक और पूजा
भाई दूज का शुभ तिलक समय दोपहर 1 बजकर 13 मिनट से लेकर 3 बजकर 28 मिनट के बीच माना गया है। इस अवधि में किया गया तिलक सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक होता है। यदि बहन और भाई अलग शहर में रहते हैं, तो भी सच्चे मन से की गई पूजा का फल उतना ही शुभ होता है जितना सामने बैठकर तिलक करने से प्राप्त होता है।









