छोटी दिवाली का महत्व और शुभ कार्य
छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है, दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाती है और यह दिन धार्मिक एवं आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे शुभ कर्म जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का संचार करते हैं। आइए जानते हैं कि छोटी दिवाली के अवसर पर किन कार्यों को करने से घर में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है।
घर की सफाई और पूजा का विशेष महत्व
छोटी दिवाली के दिन सुबह-सुबह घर की साफ-सफाई करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पुराने, टूटा-फूटा या बेकार सामान घर से बाहर निकालना शुभ संकेत है, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में सकारात्मकता का वास सुनिश्चित करता है। साथ ही, सूर्योदय से पहले तेल स्नान और तेल अभिषेक का भी विशेष महत्व है, जिससे शरीर और मन दोनों की शुद्धि होती है और व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
यमराज और मां लक्ष्मी की पूजा
शाम के समय घर के द्वार के दोनों ओर दीप जलाना शुभ माना जाता है। साथ ही, दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का दीपक जलाना यम दीपदान कहलाता है, जो अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का भी विशेष महत्व है। घर में घी या तेल के दीप जलाकर पूजा करने से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
दान, दीपदान और घर की सजावट
छोटी दिवाली के दिन जरूरतमंदों को दीपक, तिल, तेल, अन्न या कपड़े का दान करना शुभ माना जाता है। इससे पितृदोष और दरिद्रता दोनों का नाश होता है। साथ ही, घर में कपूर या धूप जलाकर और मुख्य द्वार पर रंगोली बनाकर घर में सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बनाए रखा जाता है। इस दिन घर की खुशबू और रोशनी फैलाने के लिए दीपक जलाना और घर को सजाना भी शुभ माना जाता है।
छोटी दिवाली कब और कैसे मनाएं
छोटी दिवाली, धनतेरस के अगले दिन और दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाती है, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। इस दिन घर की सफाई, दीप जलाना, दान करना और मां लक्ष्मी तथा यमराज की पूजा करना शुभ कार्य हैं। शाम के समय दक्षिण दिशा में यमराज के लिए तेल का दीपक जलाना और घर के मुख्य द्वार पर प्रार्थना करना भी लाभकारी माना जाता है। पटाखे जलाने की परंपरा मुख्य दिवाली के दिन ही होती है, लेकिन कुछ लोग छोटी दिवाली की शाम को सीमित मात्रा में पटाखे चलाते हैं।










