अफगानिस्तान में भूकंप के झटके और क्षेत्रीय प्रभाव
शुक्रवार को अफगानिस्तान में 5.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया। यह भूकंप ताजिकिस्तान सीमा के पास लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर केंद्रित था, जिससे जम्मू-कश्मीर सहित पड़ोसी भारतीय क्षेत्रों में भी झटके महसूस किए गए। इस प्राकृतिक आपदा के तुरंत बाद किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान या घायल होने की खबर नहीं मिली है, लेकिन पिछले महीने आए विनाशकारी भूकंप की भयावह यादें अभी भी लोगों के मन में ताजा हैं।
पिछले भूकंपों का इतिहास और क्षेत्रीय संवेदनशीलता
सितंबर महीने में दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था, जो चार दिनों के भीतर उसी क्षेत्र में तीसरा बड़ा झटका था। इस भूकंप ने देश में भारी तबाही मचाई, जिसमें 2200 से अधिक लोग अपनी जान गंवा बैठे। उस समय के भूकंप ने पूरे गांवों को जमींदोज कर दिया और लोग मिट्टी की ईंटों तथा लकड़ी से बने घरों के मलबे में फंस गए। अफगानिस्तान भूकंपीय गतिविधियों के लिए अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, क्योंकि यहाँ भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें टकराती हैं, जिससे भूकंप की घटनाएँ आम हैं।
भूकंप की जटिलता और भूगर्भीय कारण
यह क्षेत्र अत्यधिक भूगर्भीय दबाव का सामना करता है, जो पृथ्वी की परतों को तोड़कर दरारें पैदा करता है। खासकर हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला में, यह दबाव गहराई तक जाकर स्थलमंडल को प्रभावित करता है। उत्तरी अफगानिस्तान के पामीर और हिंदुकुश क्षेत्र में अक्सर तीव्र भूकंप आते हैं, जिनकी गहराई 200 किलोमीटर तक पहुंच सकती है, जो विश्व में एक दुर्लभ घटना है। इसके विपरीत, पश्चिमी पाकिस्तान और दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान में फैली सुलेमान पर्वत श्रृंखला में भूकंप अधिकतर उथले और सतह के करीब होते हैं, जिससे भारी तबाही का खतरा रहता है।











