गृह मंत्री अमित शाह की सारण रैली में राजनीतिक संदेश
शुक्रवार को गृह मंत्री अमित शाह ने सारण जिले के तरैया मैदान में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सारण जिलाध्यक्ष बृजमोहन प्रसाद सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया और लोकनायक जयप्रकाश नारायण तथा भिखारी ठाकुर को श्रद्धांजलि दी। साथ ही, उन्होंने सांसद राजीव प्रताप रुडी के सवाल का जिक्र करते हुए बताया कि क्यों वे आज ही सारण आए हैं।
सारण की ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्ता
अमित शाह ने कहा कि जब प्रचार की शुरुआत सारण से होती है, तो विजय निश्चित ही मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि लालू यादव के जंगलराज के खिलाफ लड़ाई में सारण की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रही है। शाह ने याद दिलाया कि बिहार के युवाओं को लालू-राबड़ी के शासनकाल में किस तरह से दबाया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि एनडीए और नीतीश कुमार की सरकार बिहार में सबसे अधिक बहुमत के साथ बनने जा रही है।
बिहार में चुनावी रणनीति और विकास के संकेत
गृह मंत्री ने कहा कि इस बार बिहार को चार दिवाली मनाने का अवसर मिलेगा। पहली दिवाली भगवान राम के वनवास से लौटने की खुशी में मनाई जाएगी, दूसरी छठ पूजा के दौरान खाता खाली न रहे, इसकी व्यवस्था की गई है। उन्होंने जीविका दीदियों के खातों में दस–दस हजार रुपये भेजने का भी जिक्र किया। शाह ने कहा कि तीसरी दिवाली जीएसटी स्लैब में बदलाव का प्रतीक है, और चौथी दिवाली तब मनाई जाएगी जब लालू-राहुल और उनके साथियों का सूपड़ा साफ हो जाएगा।
सारण से राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास का संदेश
अमित शाह ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों का सफाया करने का काम नरेंद्र मोदी ने किया है। उन्होंने राम मंदिर निर्माण का भी जिक्र किया और बताया कि बिहार में भी पुनौरा धाम में मां सीता का भव्य मंदिर बन रहा है। शाह ने कहा कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कर भारत का एकीकरण किया गया है। साथ ही, उन्होंने लालू-कांग्रेस के शासनकाल में आतंकवाद और जंगलराज का जिक्र किया।
बिहार में विकास और सुरक्षा का संदेश
अमित शाह ने कहा कि एनडीए सरकार ने बिहार में अनेक विकास कार्य किए हैं। उन्होंने शहाबुद्दीन के बेटे को टिकट देने के मुद्दे पर आरजेडी को घेरा और पूछा कि क्या ऐसे लोगों को टिकट देकर बिहार सुरक्षित रह सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कहीं भी गलतफहमी से भी आरजेडी को सीटें मिलीं, तो जंगलराज फिर लौट आएगा। उन्होंने सारण की सभी 10 सीटों पर एनडीए को विजयी बनाने की अपील की।
लालू यादव का राजनीतिक सफर सारण से शुरू
सारण जिले से ही लालू प्रसाद यादव ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वर्ष 1977 में लालू यादव ने सारण (तब छपरा) लोकसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ा था। उस समय वह जनता पार्टी के उम्मीदवार थे और इमरजेंसी विरोधी लहर का फायदा उठाते हुए उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार को हराया था। उस समय लालू की उम्र केवल 29 वर्ष थी।











