बिहार में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय, एनडीए में बदलाव की शुरुआत
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए गठबंधन में लंबे समय से चल रही खींचतान के अंत में रविवार को सीटों का बंटवारा स्पष्ट हो गया है। इस बार बीजेपी और जेडीयू के बीच समान संख्या में सीटें साझा करने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले तक जेडीयू, बीजेपी से अधिक सीटें जीतकर अपने बड़े भाई के पद पर कायम था, लेकिन अब समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं।
सामान सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला
बीजेपी और जेडीयू ने मिलकर बिहार की कुल 243 सीटों में से 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने इस सीट बंटवारे की घोषणा की। इसके अलावा चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (आर) 29 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि उपेंद्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी की पार्टियों को 6-6 सीटें मिली हैं।
बदलते समीकरण और राजनीतिक प्रभाव
बिहार की सियासत में यह पहली बार है जब जेडीयू और बीजेपी ने बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। 2005 से लेकर 2020 तक जेडीयू ने बीजेपी से अधिक सीटें जीतकर अपने बड़े भाई के पद को बनाए रखा था। लेकिन इस बार समीकरण पूरी तरह से पलट गए हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने 115 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी ने 110 सीटें हासिल की थीं। उस समय जेडीयू का वर्चस्व था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
सियासी समीकरण और भविष्य की राह
बिहार में एनडीए गठबंधन में 20 साल बाद सीन बदल गया है। 2024 के चुनाव में जेडीयू से एक सीट अधिक पर बीजेपी ने चुनाव लड़ा था, और अब दोनों दल बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमत हो गए हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि बीजेपी का प्रभाव क्षेत्र बढ़ रहा है, जबकि जेडीयू का वर्चस्व कम हो रहा है। हालांकि, नीतीश कुमार ही एनडीए का मुख्य चेहरा रहेंगे। सवाल यह है कि चुनाव के बाद सत्ता की कमान किसके हाथ में होगी, खासकर जब सीटें कम आने पर बीजेपी अपनी भूमिका को मजबूत कर सकती है।









