बिहार चुनाव में AIMIM का बड़ा कदम: उम्मीदवारों की संख्या में वृद्धि
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। इस बार पार्टी लगभग 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जो पिछली बार की तुलना में पांच गुना अधिक है। AIMIM का उद्देश्य बिहार में तीसरे विकल्प के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है। इसी क्रम में आज पार्टी ने उन सीटों की सूची जारी की है जहां वह अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेगी।
बिहार की प्रमुख सीटों पर AIMIM का विस्तार
बिहार के विभिन्न जिलों में AIMIM ने अपनी चुनावी रणनीति के तहत कई सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। पूर्णिया जिले में अमौर, बायसी और क़स्बा विधानसभा, कटिहार जिले में बलरामपुर, प्राणपुर, मनिहारी, बरारी और कदवा विधानसभा, अररिया जिले में जोकीहाट और अररिया विधानसभा, गया जिले में शेरघाटी और बेला विधानसभा, मोतिहारी जिले में ढाका और नरकटिया विधानसभा, नवादा जिले में नवादा शहर विधानसभा, जमुई जिले में सिकंदरा विधानसभा, भागलपुर जिले में भागलपुर और नाथनगर विधानसभा, सिवान जिले में सिवान विधानसभा, दरभंगा जिले में जाले, केवटी, दरभंगा ग्रामीण और गौरा बौराम विधानसभा, समस्तीपुर जिले में कल्याणपुर, सीतामढ़ी जिले में बाजपट्टी, मधुबनी जिले में बिस्फी, वैशाली जिले में महुआ, और गोपालगंज जिले में गोपालगंज विधानसभा शामिल हैं।
आम चुनाव में AIMIM की रणनीति और राजनीतिक स्थिति
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा कि पार्टी का लक्ष्य 100 सीटों पर चुनाव लड़ने का है। उनका मानना है कि इस बार बिहार में एनडीए और महागठबंधन दोनों को AIMIM की मौजूदगी का एहसास होगा। 2020 के चुनाव में महागठबंधन ने AIMIM पर सेक्युलर वोट बांटने का आरोप लगाया था, लेकिन अब पार्टी इस बात को नकारते हुए अपने क्षेत्रीय आधार का विस्तार कर रही है।
अख्तरुल ईमान ने यह भी बताया कि उन्होंने लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को गठबंधन का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अब AIMIM अपने क्षेत्रीय आधार को मजबूत करने और समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ तीसरे मोर्चे के गठन की दिशा में प्रयासरत है।
पिछले चुनाव में AIMIM ने बसपा और रालोसपा के साथ गठबंधन कर पांच सीटें जीती थीं, जिससे RJD-कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन को नुकसान पहुंचा था। हालांकि, 2022 में AIMIM के चार विधायक RJD में शामिल हो गए हैं, और वर्तमान में अख्तरुल ईमान ही बिहार में पार्टी के एकमात्र विधायक हैं। विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM का मुख्य आधार सीमांचल क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी लगभग 17 प्रतिशत है, लेकिन विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी पर्याप्त नहीं है।









