हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या का मामला गरमाया
हरियाणा के अनुभवी आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के बाद यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। उनकी मौत के पांच दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक उनका पोस्टमार्टम नहीं हुआ है और परिवार अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं है।
मृतक का शव अभी भी अस्पताल की मॉर्च्यूरी में है
पूरन कुमार का शव अभी भी अस्पताल के शवगृह में रखा हुआ है। परिवार का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, वे उनके अंतिम संस्कार में भाग नहीं लेंगे। शनिवार को उनका शव पीजीआई (Post Graduate Institute of Medical Education and Research) लाया जाएगा, जहां उनका पोस्टमार्टम किया जाएगा।
परिवार और सरकार के बीच न्याय की मांग
परिवार का आरोप है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, वे पूरन कुमार को अंतिम विदाई नहीं देंगे। वहीं, हरियाणा IAS (Indian Administrative Service) एसोसिएशन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने और जांच की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा कि मृतक की पत्नी और वरिष्ठ IAS अधिकारी अमनीत पी कुमार द्वारा मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों को भेजे गए ज्ञापन की गहराई से जांच होनी चाहिए।
संबंधित जांच और आरोपों की पारदर्शिता पर जोर
हरियाणा सरकार ने इस मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। जांच टीम उनके घर भी पहुंची थी, लेकिन परिवार ने पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं दी है, क्योंकि अमनीत कुमार ने एफआईआर में दर्ज तथ्यों को अधूरा बताया है।
आरोपों और आत्महत्या के पीछे की वजहें
2001 बैच के आईपीएस अधिकारी पूरन कुमार ने आत्महत्या से पहले आठ पन्नों का एक ‘फाइनल नोट’ छोड़ा था, जिसमें उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों पर मानसिक उत्पीड़न और अपमान का आरोप लगाया। इनमें हरियाणा DGP (Director General of Police) शत्रुजीत कपूर और रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारनिया का नाम शामिल है।
मामले की जांच में तेजी और आरोपों की गंभीरता
पूरन कुमार की पत्नी और आईएएस अधिकारी अमनीत पी कुमार सीधे तौर पर रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारनिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही हैं। इस मामले में जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सभी की नजरें टिकी हैं।











