मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण का अनूठा आयोजन
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में एक विशेष और भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसने वन्यजीव संरक्षण और नारी शक्ति का अनूठा संगम दिखाया। इस आयोजन में हजारों महिलाओं और छात्राओं ने मिलकर भारत की पहली स्वदेशी मादा चीता ‘मुखी’ की विशाल और आकर्षक प्रतिकृति बनाई। यह आयोजन ‘सेवा संकल्प अभियान-2026’ के तहत ढेंगदा क्रीड़ा परिसर में हुआ, जिसमें ह्यूमन रंगोली के माध्यम से चीता की जीवंत प्रतिमा बनाई गई।
महिला और बाल विकास विभाग की भागीदारी से हुआ खास आयोजन
श्योपुर कलेक्टर शीला दाहिमा की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ी हजारों महिलाओं, स्व-सहायता समूहों की सदस्याओं और छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि प्रतिभागियों ने चीते के मुख और शरीर के रंगों से मेल खाते हुए वस्त्र पहनकर जमीन पर उसकी विशाल आकृति उकेरी। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए स्थानीय लोग और प्रशासनिक अधिकारी भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
चीता ‘मुखी’ का इतिहास और संरक्षण प्रयास
मादा चीता ‘मुखी’ भारत के वन्यजीव इतिहास में एक खास स्थान रखती है। इसका जन्म 29 मार्च 2023 को कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में हुआ था, और यह नामीबिया से लाई गई चीता ‘ज्वाला’ की संतान है। लगभग 70 साल पहले भारत से विलुप्त हो चुके चीते अब फिर से देश में लौट रहे हैं, और मुखी पहली भारतीय चीता है। नवंबर 2025 में मुखी ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, जो भारत में चीता पुनर्स्थापन परियोजना की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक हैं। वर्तमान में वह तीन वर्ष की हो चुकी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह न केवल वन्यजीव संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, बल्कि नारी शक्ति का भी अद्भुत प्रदर्शन है। इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों से वन्यजीवों के प्रति जनता का लगाव बढ़ता है और ‘कूनो’ की पहचान विश्व स्तर पर मजबूत होती है।









