सरकारी शटडाउन और व्यापारियों की आपत्तियों पर दिपके का बयान
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर व्यापारियों की चिंता के जवाब में अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि कारोबार पर प्रभाव तब पड़ता है जब सरकार पूरे शहर को बंद कर देती है, इंटरनेट सेवाएं स्थगित कर देती है और नागरिकों की आवाजाही पर रोक लगाती है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध से व्यापार को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि जब सरकार शहर को युद्ध क्षेत्र में बदल देती है, तो व्यापार प्रभावित होता है।
दिपके ने यह भी बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी शुरुआत से ही गांधीजी के अहिंसा और शांति के मार्ग का पालन करती आई है। पार्टी ने मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर जैसे शहरों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए हैं। उन्होंने कहा कि जयपुर में उन पर हमला हुआ, लेकिन उन्होंने हिंसा का जवाब नहीं दिया। पार्टी संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का सम्मान करती है और उनका प्रयोग शांतिपूर्ण तरीके से करना चाहती है।
शांति और लोकतंत्र की प्रतिबद्धता
अभिजीत दिपके ने जोर देकर कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और विरोध लोकतंत्र का मूल हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने विपक्ष में रहते हुए भी दशकों तक सरकारों के खिलाफ आवाज उठाई है। उनका मानना है कि नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं, न कि किसी विशेष सुविधा की मांग। सरकार का कर्तव्य है कि वह जनता की बात सुने और जवाबदेही तय करे, न कि उन्हें चुप कराए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार से सवाल करना, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और जनप्रतिनिधियों से पूछताछ करना अराजकता नहीं है। यह लोकतंत्र की आत्मा है। पार्टी का मानना है कि सत्ता में रहने वाली पार्टी भी विपक्ष में रहते हुए प्रदर्शन करती रही है। इसलिए, विरोध करना और सवाल उठाना लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, जिसे दबाना नहीं चाहिए।
व्यापारियों की सुरक्षा और प्रदर्शन स्थल का सुझाव
व्यापारियों का कहना है कि सड़कें बंद होने, बैरिकेडिंग और रास्ते बदलने से ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुंच पाते। इससे सामान की डिलीवरी और कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित होती है। उन्होंने आग, भगदड़ और आपातकालीन सेवाओं जैसे एंबुलेंस और दमकल वाहनों के रास्ते में रुकावट का भी जिक्र किया। जुलाई और अक्टूबर 2026 में हुए प्रदर्शनों का हवाला देते हुए, व्यापारियों ने कहा कि उन्हें शाम 6:30 बजे तक अपने प्रतिष्ठान बंद करने का निर्देश दिया गया था।
व्यापारियों ने सुझाव दिया कि रामलीला मैदान या बुराड़ी जैसे खुले स्थानों पर प्रदर्शन किया जाए। उन्होंने प्रदर्शन स्थल बदलने, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की समीक्षा की मांग की। साथ ही, कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रदर्शन स्थल बदलने और प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात का भी आग्रह किया। इन सुझावों की प्रतियां दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट में बताया गया कि एनडीएमसी के सेंट्रल पार्क को बंद करने से छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को नुकसान होगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है। जस्टिस बागची ने याचिकाओं को मिलती-जुलती बताया और कहा कि नुकसान का मुद्दा 26 तारीख को उठाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर टॉर्ट कानून के तहत मुआवजे पर भी विचार किया जाएगा। इस पूरे विवाद में प्रदर्शन का अधिकार, व्यापार, सुरक्षा और आजीविका का सवाल भी प्रमुख रूप से सामने आया है।









