जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। पार्टी के सदस्यों सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा गया है, जबकि अजिंक्य शिंदे को 5000 रुपये का बॉन्ड भरवाने के बाद छह महीने के लिए शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा कर दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये तीनों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर कैसे पहुंचे, पुलिस ने उन्हें क्यों हिरासत में लिया, और जेल तक की यात्रा में क्या-क्या घटनाएं हुईं? आइए इस पूरी घटना की टाइमलाइन पर नजर डालते हैं।
13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पहुंचने का मामला और पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर को पार्टी के कुल 14 सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे, जिनमें सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे भी शामिल थे। पुलिस का दावा है कि इन लोगों ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किए जाने के बावजूद वहां पहुंचने का प्रयास किया। उल्लेखनीय है कि हाल ही में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है, जिससे यह स्थान अब प्रदर्शन के लिए मान्यता प्राप्त नहीं है। पुलिस ने इन प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे पुलिस के कार्य में बाधा डालने लगे। इसके बाद पुलिस ने इन सभी 14 व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया।
दो एफआईआर और गिरफ्तारी का कारण
पुलिस के अनुसार, इस मामले में दो अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। पहली FIR नंबर 289/26 कनॉट प्लेस थाने में भारतीय दंड संहिता (BNS) की धाराओं 223(a), 332 और 61(2) के तहत दर्ज हुई है। दूसरी FIR नंबर 128/26 संसद मार्ग थाने में BNS की धाराओं 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) के तहत दर्ज की गई है। इन दोनों FIRs का दर्ज होना यह दर्शाता है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। पुलिस का आरोप है कि ये लोग सोशल मीडिया के माध्यम से दूसरों को भी प्रदर्शन में भाग लेने के लिए उकसा रहे थे, जिससे कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा था।









