नॉर्वेजियन नोबेल समिति का फैसला और प्रतिक्रिया
नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने घोषणा की है कि वह 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वाशिंगटन के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बजाय वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को प्रदान करेगी। इस निर्णय के बाद, व्हाइट हाउस ने तीखे शब्दों में प्रतिक्रिया दी है।
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोशल मीडिया पर कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प शांति स्थापित करने, युद्ध विराम कराने और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनका दिल मानवता के प्रति समर्पित है और उनके जैसी इच्छाशक्ति किसी में नहीं है, जो पहाड़ों को हिला सके।
वहीं, व्हाइट हाउस ने इस फैसले को लेकर नॉर्वेजियन समिति पर कटाक्ष किया है। उनका आरोप है कि समिति ने शांति के बजाय राजनीति को प्राथमिकता दी है। इस संदर्भ में, उन्होंने कहा कि ट्रम्प ने युद्ध विराम और बंधक समझौते की घोषणा कर गाजा में शांति का प्रयास किया है।
नोबेल पुरस्कार का चयन और राजनीतिक विवाद
रिपब्लिकन नेता ट्रम्प ने अभी तक इस निर्णय पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर तीन वीडियो पोस्ट किए हैं। इन वीडियो में उनके समर्थक गाजा में हुए समझौते का जश्न मनाते नजर आ रहे हैं।
वहीं, वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार लोकतंत्र को मजबूत बनाने के उनके प्रयासों और तानाशाही से लोकतंत्र में शांतिपूर्ण संक्रमण के संघर्ष के लिए दिया गया है। यह पुरस्कार उन्हें उस समय मिला है जब विश्व के कई देश अधिनायकवाद की ओर बढ़ रहे हैं।
ओस्लो स्थित नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने अपने बयान में कहा कि उन्हें यह पुरस्कार 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 1.2 मिलियन डॉलर) की राशि में प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान वेनेजुएला के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और तानाशाही से लोकतंत्र में न्यायसंगत बदलाव लाने के उनके प्रयासों के लिए है।
विवाद और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह पुरस्कार राजनीतिक संकेतों से भरा हुआ है, जबकि समर्थक इसे लोकतंत्र के समर्थन में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।
इस पुरस्कार के साथ ही, विश्व में लोकतंत्र और मानवाधिकारों के संरक्षण का मुद्दा फिर से उभर कर सामने आया है। यह निर्णय न केवल वेनेजुएला बल्कि पूरे विश्व के लिए एक संदेश है कि लोकतंत्र और शांति के लिए संघर्ष जारी रहेगा।











