दिल्ली में जलभराव से निपटने के लिए नई योजना मंजूर
बारिश के दिनों में जलभराव की समस्या से जूझ रहे दिल्ली के चार विधानसभा क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना को स्वीकृति मिली है। इस योजना के तहत किराड़ी, मुंडका, बवाना और नांगलोई जाट में पानी की निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए रेलवे लाइन के किनारे लगभग 4.5 किलोमीटर लंबी नई ट्रंक ड्रेन का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना की संशोधित लागत लगभग 263.45 करोड़ रुपये है।
बढ़ी हुई क्षमता और नई ड्रेन की विशेषताएं
इस नई ड्रेन की डिजाइन क्षमता 760 क्यूसेक होगी, जो मौजूदा नालों पर बढ़ते दबाव के समय अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में मदद करेगी। आसान भाषा में कहें तो जब बारिश के दौरान मौजूदा जल निकासी व्यवस्था पर अधिक दबाव पड़ेगा, तब यह नई ट्रंक ड्रेन अतिरिक्त पानी को तेजी से बाहर निकालने का काम करेगी। इस परियोजना का लक्ष्य अगले साल दिसंबर तक पूरा करना है।
किराड़ी में क्यों जरूरी है यह नई व्यवस्था?
किराड़ी क्षेत्र में बारिश के समय जल निकासी की व्यवस्था पर काफी दबाव रहता है। यहाँ का अनुमानित रनऑफ करीब 1193 क्यूसेक है, जबकि मौजूदा KSN ड्रेन की क्षमता केवल 88 क्यूसेक है। इसके अलावा दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) एक और ट्रंक ड्रेन बना रहा है, जिसकी क्षमता लगभग 433 क्यूसेक है। फिर भी, लगभग 760 क्यूसेक पानी की निकासी की आवश्यकता बनी रहती है। इस अतिरिक्त पानी को संभालने के लिए रेलवे लाइन के किनारे नई ट्रंक ड्रेन का निर्माण किया जाएगा।
यह नई ड्रेन करीब 70 अनधिकृत कॉलोनियों के लिए मुख्य आउटफॉल का काम करेगी, जिससे बारिश का पानी आसानी से निकलेगा। इसमें रानिखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया, वीणा एन्क्लेव, रतन पार्क, राजधानी पार्क, रोहिणी सेक्टर-20 से 22, नांगलोई JJ क्लस्टर, अध्यापक नगर और शिव राम पार्क जैसे इलाकों को भी लाभ मिलेगा। प्रस्तावित ड्रेन मुंडका हाल्ट रेलवे स्टेशन के पास से शुरू होकर रेलवे लाइन के किनारे लगभग 4.48 किलोमीटर तक जाएगा। आगे इसका आउटफॉल सप्लीमेंटरी ड्रेन में होगा।
ड्रेन की चौड़ाई और गहराई इलाके की जगह और पानी की जरूरत के अनुसार तय की जाएगी, ताकि बारिश के समय अधिकतम पानी बाहर निकाला जा सके। शुरुआत में इसकी लागत लगभग 220.93 करोड़ रुपये थी, लेकिन बाद में अतिरिक्त मदों को जोड़ने के बाद इसे बढ़ाकर 263.45 करोड़ रुपये कर दिया गया। इस रकम में सिविल वर्क, पर्यावरण संरक्षण, मेंटेनेंस, रेलवे स्टोर की शिफ्टिंग और अन्य जरूरी कार्य शामिल हैं।
यह नई जल निकासी व्यवस्था सिर्फ किराड़ी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे मुंडका, बवाना और नांगलोई जाट में भी बारिश के पानी की निकासी मजबूत होगी। खासतौर पर उन इलाकों में राहत मिलेगी जहां लंबे समय तक पानी जमा रहता है।











