दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए नई पहल
दिल्ली सरकार ने वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए दो महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनका उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों का वैज्ञानिक तरीके से पता लगाना और छोटी सड़कों की सफाई को प्रभावी बनाना है। इन निर्णयों का मकसद पूरे साल प्रदूषण से लड़ने की रणनीति को मजबूत करना है, न कि केवल सर्दियों में ही इसकी चिंता करना। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई दिल्ली कैबिनेट की बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
छोटी सड़कों की सफाई और प्रदूषण स्रोतों की निगरानी
सरकार ने तय किया है कि 10 मीटर से कम चौड़ी राइट ऑफ वे वाली करीब 609 किलोमीटर लंबी छोटी सड़कों को मशीनी सफाई के दायरे में लाया जाएगा। इनमें 250 वार्डों की 854 सड़कें शामिल हैं, जिन पर अभी तक नियमित सफाई की व्यवस्था नहीं है। धूल प्रदूषण का मुख्य कारण है, इसलिए इन सड़कों की नियमित मशीनी सफाई से वायु प्रदूषण में कमी आएगी। इसके लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) को 30 इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) आधारित रोड स्वीपिंग मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनका संचालन और तैनाती निगम की जिम्मेदारी होगी। इस योजना पर अगले दस वर्षों में लगभग 393.73 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
प्रदूषण का स्रोत पता लगाने के लिए वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली
कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि दिल्ली में PM2.5 और PM10 प्रदूषण के स्रोतों की रियल-टाइम निगरानी और विश्लेषण के लिए एक नई प्रणाली विकसित की जाएगी। इस कार्य में IIT दिल्ली (Indian Institute of Technology Delhi) के साथ साझेदारी की जाएगी। इस तकनीक से पता चलेगा कि वाहनों, सड़क की धूल, बायोमास जलाने और अन्य स्रोतों का प्रदूषण में कितना योगदान है। इस प्रणाली के माध्यम से 24 घंटे लगातार प्रदूषण स्रोतों का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा, जिससे संबंधित क्षेत्रों में आवश्यक कार्रवाई आसान होगी।
राउज एवेन्यू स्थित सुपर साइट को फिर से सक्रिय किया जाएगा और मोबाइल लैब की मदद से प्रदूषण हॉटस्पॉट का अध्ययन किया जाएगा। इस परियोजना में रियल-टाइम डैशबोर्ड, विश्लेषणात्मक रिपोर्ट और DPCC (Delhi Pollution Control Committee) अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के कार्य भी शामिल हैं। यह सहयोग पांच वर्षों के लिए होगा और इस पर लगभग 19.22 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में प्रदूषण को केवल सर्दियों की समस्या नहीं माना जाता, बल्कि पूरे साल इसकी रोकथाम के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सड़क की धूल, वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियां, औद्योगिक प्रदूषण, कचरा जलाना और हरित क्षेत्र का विस्तार-all पर एक साथ काम किया जा रहा है। इन दोनों फैसलों को प्रदूषण नियंत्रण की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना गया है, जिसमें छोटी सड़कों की सफाई और वैज्ञानिक निगरानी दोनों शामिल हैं।










