दिल्ली में SIR वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर पूर्व राजनयिकों की नाराजगी
दिल्ली में SIR (सामाजिक पहचान रजिस्टर) वेरिफिकेशन प्रक्रिया को लेकर मयूर विहार के IFS (इंडियन फॉरेन सर्विस) अपार्टमेंट में रहने वाले पूर्व राजनयिकों ने अपनी असंतोष व्यक्त किया है। इन पूर्व अधिकारियों का कहना है कि उनके नाम पिछली वोटर लिस्ट से मेल नहीं खा रहे हैं, जिससे वे काफी परेशान हैं। इस समस्या के कारण उन्होंने प्रक्रिया को बनाने वालों को हटाने की भी बात कही है। उनकी बेटी रुक्मिणी ने बताया कि लगभग 50 से 60 पूर्व अधिकारी इस वेरिफिकेशन की जटिलताओं से जूझ रहे हैं। इसी तरह पूर्व राजदूत कैलाश अग्रवाल ने भी इस प्रक्रिया को उलझा हुआ और कठिन बताया है।
वेरिफिकेशन में जटिलताएं और राजनीतिक विवाद
पूर्व राजदूत कैलाश अग्रवाल ने इस प्रक्रिया की कठिनाइयों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह वेरिफिकेशन प्रक्रिया इतनी जटिल और भ्रमित करने वाली हो गई है कि पढ़े-लिखे और जागरूक लोग भी इसे पूरा करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि यदि शिक्षित और जागरूक लोगों को ही इतनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो सामान्य जनता का क्या हाल होगा। दिल्ली में इस वेरिफिकेशन को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। चुनाव अधिकारियों ने लाखों वोटरों को चिन्हित किया है, जिनके रिकॉर्ड पिछली वोटर लिस्ट से मेल नहीं खाते या जिनमें कोई गड़बड़ी पाई गई है। दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) ने स्पष्ट किया है कि नोटिस का मतलब यह नहीं कि नाम लिस्ट से हटा दिया जाएगा, बल्कि यह वेरिफिकेशन और आवश्यक दस्तावेज जमा करने का अवसर है।
सुप्रीम कोर्ट में चल रहा मामला और बुजुर्गों की चिंता
अब “अनमैप्ड विद लास्ट SIR” श्रेणी इस प्रक्रिया का एक बड़ा मुद्दा बन गई है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां अदालत ने पूछा है कि क्या नोटिस बिना सोचे-समझे और मशीनरी के आधार पर जारी किए जा रहे हैं। कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी पूछा है कि क्या इस प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अतिरिक्त फिल्टर लगाए जा सकते हैं। मयूर विहार के इन पूर्व राजनयिकों के लिए यह सवाल सिर्फ वेरिफिकेशन का नहीं, बल्कि यह भी है कि क्या यह प्रक्रिया बुजुर्गों और चलने-फिरने में कठिनाई महसूस करने वाले लोगों के लिए आसान बनाई गई है या नहीं।









