सड़क यात्राओं में बस सुरक्षा की गंभीर स्थिति
देशभर में रोजाना हजारों यात्री स्लीपर बसों में यात्रा करते हैं, लेकिन क्या ये बसें वास्तव में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाती हैं? ग्रेटर नोएडा में हाल ही में हुए बस हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई, जिसने बसों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
आजतक की टीम ने दिल्ली, जयपुर और लखनऊ में चलने वाली स्लीपर और मोडिफाइड बसों का गहन निरीक्षण किया, जिसमें कई चौंकाने वाली खामियां उजागर हुईं। कई बसों में इमरजेंसी एग्जिट का दरवाजा जाम मिला, तो कहीं वह लॉक कर दिया गया था। कुछ बसों में एग्जिट के सामने सीटें और सामान रखे थे, जिससे निकास का रास्ता बाधित हो गया था। सबसे चिंता की बात यह रही कि कई बसों में आग लगने की स्थिति में शीशा तोड़ने वाला हैमर भी मौजूद नहीं था। कहीं फायर एक्सटिंग्विशर छोटा था, तो कहीं उसकी एक्सपायरी डेट भी नहीं थी। यह पूरी जांच यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे के बाद की गई, जिसने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सड़क सुरक्षा में खामियों का खुलासा
आशुतोष मिश्रा ने दिल्ली से जम्मू-कटरा जाने वाली बस की जांच की, जिसमें कई यात्री सवार थे। जांच में पता चला कि बस में केवल एक ही इमरजेंसी एग्जिट था, जो जाम और चोक हालत में था। यदि कोई दुर्घटना हो जाती, तो यात्रियों के लिए बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचता।
फायर एक्सटिंग्विशर ड्राइवर की सीट के पीछे एक बॉक्स में रखा था, जिसे निकालने और इस्तेमाल करने में समय लग सकता था। आग लगने के शुरुआती सेकंड्स में यह देरी खतरनाक साबित हो सकती है। इसके अलावा, बस की खिड़कियों पर कोई भी इमरजेंसी एग्जिट नहीं बनाया गया था, और शीशा तोड़ने के लिए जरूरी हैमर भी मौजूद नहीं था। जब टीम ने यह जांच पूरी की, तो बस वहां से चली गई।
सुरक्षा मानकों में असमानता और खामियां
सुशांत मेहरा ने यमुना एक्सप्रेसवे पर चलने वाली राज कल्पना बसों की पड़ताल की। कश्मीरी गेट पर जांच के दौरान बस के अंदर स्लीपर सीटें और यात्रियों के सोने की व्यवस्था तो सही मिली, लेकिन सबसे बड़ी लापरवाही इमरजेंसी गेट को लेकर सामने आई।
फायर एग्जिट गेट तो था, लेकिन वह लॉक मिला, और शीशा तोड़ने के लिए कोई हैमर नहीं था। यदि कोई हादसा हो जाता, तो यात्रियों के लिए बाहर निकलना अत्यंत कठिन हो सकता था।
अमित भारद्वाज ने आनंद विहार बस टर्मिनल पर खड़ी बसों की जांच की, जो दिल्ली से यूपी और पटना के बीच चलती हैं। एक बस में सवार यात्रियों ने बताया कि उनका सफर 26 घंटे का है और एयर कंडीशनर भी काम नहीं कर रहा है। जांच में पता चला कि इस बस में इमरजेंसी एग्जिट के लिए दरवाजे की जगह सिर्फ एक खिड़की थी, जो खुल नहीं पा रही थी।
बस की बनावट में बदलाव कर उसे 2×2 स्लीपर बस में परिवर्तित किया गया था, जिससे यात्रियों का रास्ता संकरा हो गया था। सीटों के पास शीशा तोड़ने के लिए हैमर भी नहीं था, और लोहे की सीढ़ियां भी यात्रियों के लिए खतरा बन सकती थीं।
वहीं, एक दूसरी मोडिफाइड बस बेहतर स्थिति में मिली, जिसमें हर सीट के पास हैमर था, इमरजेंसी दरवाजा सही से काम कर रहा था और CCTV कैमरा भी लगा था। यह स्पष्ट है कि सुरक्षा इंतजाम हर बस में अलग-अलग हैं।









