इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम पर विवाद और प्रशासनिक आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम हाल ही में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह कार्यक्रम 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित किया जाना है। इस आयोजन की तैयारियों के दौरान कांग्रेस ने इंदौर जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने इस संदर्भ में अटल बिहारी वाजपेयी के समय की प्रशासनिक नीतियों का भी उदाहरण दिया है।
प्रशासन की कार्यवाही और फीस वसूली पर कांग्रेस का आरोप
मध्य प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रमुख मुकेश नायक ने इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति देने में जानबूझकर देरी की। इसके साथ ही, आयोजकों से भारी-भरकम फीस भी वसूल की गई। नायक ने आरोप लगाया कि अनुमति प्राप्त करने के लिए प्रशासन ने काफी प्रयासों के बाद ही अनुमति दी, लेकिन इसके बदले में आयोजकों से दस लाख रुपये की मोटी फीस ली गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या इंदौर के इतिहास में कभी किसी राजनीतिक दल या नेता के कार्यक्रम के लिए इतनी बड़ी रकम ली गई है।
अटल बिहारी वाजपेयी के समय की तुलना और लोकतंत्र पर चिंता
मुकेश नायक ने इस प्रशासनिक रवैये की आलोचना करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी के समय का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब वाजपेयी विपक्ष में थे या उनके कार्यक्रम होते थे, तब सरकार और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से सहयोग करते थे और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान किया जाता था। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि वर्तमान में देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं, प्रशासनिक तंत्र और स्वायत्त निकायों पर राजनीतिक कब्जा बढ़ता जा रहा है। विपक्ष की आवाज और छात्रों से जुड़े मुद्दों को दबाने के लिए रुकावटें खड़ी की जा रही हैं।









