सुप्रीम कोर्ट ने जंतर मंतर प्रदर्शन की जांच के लिए समिति गठित की
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति यानी एचपीईसी को आदेश दिया है कि वह जुलाई में जंतर मंतर पर हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन की विस्तृत जांच करे। इस समिति से पेलेट गन के उपयोग, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हुई हिंसा, पुलिसकर्मियों को लगी चोटें और संपत्ति को हुए नुकसान की जांच करने को कहा गया है। साथ ही कोर्ट ने 14 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है।
प्रदर्शन से जुड़ी मुख्य घटनाएं और न्यायिक दिशा-निर्देश
यह मामला उस मार्च से संबंधित है, जो जनता पार्टी के नेतृत्व में 20 जुलाई को संसद तक निकाला गया था। यह प्रदर्शन नीट परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में हुआ था, जिसके कारण पुनः परीक्षा करानी पड़ी। प्रदर्शनकारियों ने उस समय के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा था, जिसे बाद में 25 जुलाई को उन्होंने दे दिया। सरकार ने परीक्षा सुधार के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित की।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सुरक्षा के निर्देश
10 सितंबर को हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने समिति को निर्देश दिया कि वह गवाहों की पहचान गुप्त रखे और सबूत जमा करने के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल विकसित करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन से जुड़े संवैधानिक सवाल जैसे फेस रिकग्निशन तकनीक का प्रयोग, वह स्वयं तय करेगा। साथ ही, समिति के पुनर्गठन की मांग करने वाली याचिकाओं को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया।
इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने 14 वर्षीय लड़की और उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर भी संज्ञान लिया है। लड़की के पिता पर हमले का दावा करने के बाद हिरासत में लिए गए स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़ी इस मामले में दिल्ली पुलिस को जल्द जांच कर सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने न्याय मित्र के रूप में डॉ. मोनिका गुसाईं और सी. सोलोमन को नियुक्त किया है। अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को निर्धारित है।










