उज्जैन में हनुमान प्रतिमा हटाने का प्रयास असफल, विवाद जारी
उज्जैन के कंठाल चौराहे पर स्थित करीब 170 साल पुरानी हनुमान मंदिर की प्रतिमा को सड़क चौड़ीकरण के दौरान हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन यह पूरी तरह असफल रहा। प्रशासन ने मंदिर का भवन तो तोड़ दिया, लेकिन जब हनुमान जी की प्रतिमा को स्थानांतरित करने का समय आया, तो वह जमीनी स्तर पर अटक गई। आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञों की मदद से कई प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। अब प्रशासन को इस स्थिति में संतुलन बनाना चुनौती बन गया है, जिसमें सड़क का विस्तार भी हो और श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान भी बना रहे।
प्रयास और विरोध के बीच प्रतिमा का संरक्षण संघर्ष
उज्जैन के छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग पर इस विवाद का मुख्य कारण है कि प्रशासन ने मंदिर की दीवारें और भवन का हिस्सा तो हटा दिया, लेकिन हनुमान जी की प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर ले जाने में सफलता नहीं मिली। विशेषज्ञों ने प्रतिमा के आधार और आसपास की संरचना का अध्ययन कर उसे हटाने का प्रयास किया, जिसमें इंदौर से आए इंजीनियर भी शामिल थे। दो दिनों तक चले इन प्रयासों के बावजूद, प्रतिमा अपनी जगह पर जमी रही। प्रशासन ने अब इस स्थिति में कोई जल्दबाजी न करने का फैसला किया है और विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे की योजना बना रहा है।
प्रतिमा को नुकसान से बचाने के लिए उठाए गए कदम
प्रतिमा के नीचे करीब डेढ़ फीट गहरा गड्ढा खोदा गया है, ताकि उसकी संरचना का विश्लेषण किया जा सके और यह पता लगाया जा सके कि वह किस तरह स्थापित है। इस जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य है कि प्रतिमा को बिना किसी नुकसान पहुंचाए दूसरी जगह पर सुरक्षित रूप से स्थापित किया जाए। प्रस्तावित स्थान टंकी चौक पर है, जहां प्रतिमा को स्थानांतरित करने की योजना है। इस बीच, स्थानीय श्रद्धालु और हिंदू संगठन इस प्रयास का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि कई प्रयासों के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह पर नहीं हिली, इसलिए इसे हटाने का निर्णय पुनर्विचार किया जाना चाहिए।









