दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सुरक्षा पर सवाल
दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में रविवार को एक इमारत के ढहने से सात लोगों की मौत हो गई, जिसने राजधानी में छात्रों के लिए पीजी और किराये के कमरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इस हादसे के बाद सरकार और प्रशासन ने दिल्ली की इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
हालांकि, आजतक के ‘हॉस्टल डेथ’ स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा हुआ है कि हादसे की जगह के आसपास ही कई ऐसी इमारतें हैं, जिनमें छात्रों को कमरों का ऑफर दिया जा रहा है, जबकि इन इमारतों की सुरक्षा स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हादसे में गिरफ्तार बिल्डिंग मालिक और जारी है पीजी कारोबार
सत्य निकेतन हादसे के तुरंत बाद, आजतक की टीम ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों का निरीक्षण किया। करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित ‘साईं प्रॉपर्टीज’ के ब्रोकर ने टीम को पांच मंजिला पीजी में कमरे दिखाए। इन कमरों का आकार लगभग 8×10 फीट है, जिनका किराया बिना एसी के 9 से 12 हजार रुपये और एसी वाले कमरों के लिए 18 से 20 हजार रुपये तक है।
इस हादसे में बिल्डिंग के मालिक 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता और उनके बेटे 52 वर्षीय महेश गुप्ता को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया है।
इसके बावजूद, पीजी का कारोबार अभी भी जारी है। टीम ने देखा कि हादसे के बाद भी कई छात्र पुराने पीजी छोड़कर नए विकल्प तलाश रहे हैं।
संकटग्रस्त इमारतों की स्थिति और अवैध निर्माण का खतरा
मौके से करीब 50 गज की दूरी पर मोती बाग गांव में एक मकान में मालकिन वीरवती और उनके बेटे नवीन ने पांचवीं मंजिल पर बना कमरा दिखाया। यहां की गलियां इतनी संकरी हैं कि आपातकालीन स्थिति में दमकल या एंबुलेंस पहुंचना मुश्किल हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई पुराने मकानों में बाद में अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई हैं, जिनमें से कई की नींव और संरचना कमजोर हो सकती है।
एक प्रॉपर्टी ब्रोकर ने बताया कि सत्य निकेतन में लगभग 299 मकान हैं, जिनमें से 200 से अधिक में कमर्शियल पीजी चल रहे हैं। इन मकानों में कई पुराने भवनों की संरचना को बिना उचित निरीक्षण के ही अतिरिक्त मंजिलें जोड़ दी गई हैं। यदि ये दावे सही हैं, तो यह न केवल भवन सुरक्षा का मामला है, बल्कि पूरे इलाके में अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन भी है।
प्रशासन ने हादसे के बाद स्ट्रक्चरल ऑडिट का आश्वासन दिया है, लेकिन सवाल यह है कि लंबे समय से चल रहे इन अवैध निर्माणों और पीजी गतिविधियों पर नजर क्यों नहीं रखी गई। क्या नगर निगम (MCD) को इन निर्माणों की जानकारी नहीं थी? यदि थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि कार्रवाई हुई भी, तो इन अवैध निर्माणों को क्यों चलने दिया गया?











