मध्य प्रदेश में कांस्टेबल पदों के लिए भारी प्रतिस्पर्धा
मध्य प्रदेश में कुल 7500 कांस्टेबल पदों के लिए आवेदन करने वालों की संख्या नौ लाख से अधिक पहुंच गई है। इस भर्ती प्रक्रिया में इंजीनियरिंग, MBA और PhD धारकों सहित अनेक उच्च शिक्षित उम्मीदवार भी भाग ले रहे हैं। यह संख्या दर्शाती है कि राज्य में युवाओं के बीच रोजगार की गंभीर समस्या कितनी व्यापक है। अधिकतर युवा अपनी योग्यता के बावजूद स्थायी नौकरी पाने में असमर्थ हैं, जिसके कारण वे इस तरह की पदों के लिए आवेदन कर रहे हैं।
उच्च शिक्षित युवाओं की मजबूरी और बेरोजगारी का संकट
छिंदवाड़ा की पल्लवी चौकीकर ने बताया कि उन्होंने उपयुक्त नौकरी न मिलने के कारण पुलिस कांस्टेबल भर्ती के लिए आवेदन किया है। उनके पास MBA की डिग्री है, लेकिन उन्हें अच्छी नौकरी नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा कि बाहर की नौकरी तो मिली, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण वह वहां नहीं जा सकीं। इसी तरह बैतूल की निधि धोटे ने भी एमएससी के बाद नौकरी की तलाश में निराश होकर कांस्टेबल पद के लिए आवेदन किया।
सरकारी नौकरी की चाह और युवाओं का संघर्ष
सीहोर के विजय वर्मा के पास बीएससी और एमए दोनों डिग्रियां हैं, लेकिन उनके लिए सरकारी नौकरी का महत्व अलग है। उन्होंने कहा कि उनके गांव में सरकारी नौकरी मिलना बहुत बड़ा अवसर माना जाता है। भले ही वे अधिक योग्य हों, लेकिन स्थिरता और सुरक्षा के कारण सरकारी पदों की ओर उनका रुझान है। इस भर्ती परीक्षा को लेकर मिली भारी प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि भारत में बेरोजगारी कितनी तेजी से बढ़ रही है और सरकारी पदों की संख्या सीमित होने के कारण प्रतिस्पर्धा कितनी कठिन हो गई है।











