सुप्रीम कोर्ट में छात्र आंदोलन से जुड़ी FIR रद्द करने पर सुनवाई
जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए छात्र विरोध प्रदर्शन से संबंधित FIR रद्द करने के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने कुल पांच याचिकाएं दाखिल की हैं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के नेताओं के बीच बैठक हुई थी, जिसमें सरकार ने तीन महत्वपूर्ण आश्वासन दिए। पहला, 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज FIR को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। दूसरा, इसी घटना को लेकर भविष्य में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। तीसरा, जिन छात्रों ने आत्महत्या की है, उनके परिवारों को सरकार मुआवजा देगी। मेहता ने स्पष्ट किया कि सरकार अपने इन वादों पर कायम है।
बातचीत और राज्यों की भागीदारी पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ज्योयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच के सामने मेहता ने दिल्ली पुलिस की याचिका का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों की याचिकाएं भी लगभग समान हैं, बस एक पैराग्राफ अलग है, जो केवल दिल्ली से संबंधित है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार करीब 2873 ऐसे लोग प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे, जिन पर पहले से गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। दिल्ली पुलिस चाहती है कि केवल इन्हीं 2873 व्यक्तियों के खिलाफ नई FIR दर्ज की जाए, यदि उन्होंने किसी को शारीरिक नुकसान पहुंचाया हो या संपत्ति को नुकसान पहुंचाया हो। मेहता ने यह भी बताया कि दिल्ली के अलावा बिहार, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल ने भी इसी तरह की याचिकाएं दाखिल की हैं। इस पर चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या FIR केवल इन राज्यों में ही दर्ज हैं। जवाब में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि नहीं, और भी राज्य इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।
अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई वार्ताओं का प्रभाव
केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के साथ हुई बैठक में भरोसा दिलाया कि प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और भविष्य में नई FIR नहीं की जाएगी। साथ ही, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का भी आश्वासन दिया गया। इन आश्वासनों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आगे की कार्रवाई पर विचार किया। यह कदम प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच संवाद और भरोसे को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है। इस फैसले का असर देशभर के छात्रों और प्रदर्शनकारियों के बीच सकारात्मक संदेश भेजता है, जो न्यायपालिका की निष्पक्षता और सरकार की जिम्मेदारी को दर्शाता है।









