ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया पर बढ़ता कानूनी संकट
ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) पर कानूनी जटिलताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की एक जांच रिपोर्ट में संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस रिपोर्ट में DGCA (ड्रगेशन एविएशन कंट्रोलर) के नाम से कथित फर्जी NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) जमा करने का मामला भी शामिल है।
मंत्रालय की जांच में सामने आईं अनियमितताएं
मंत्रालय के सहायक निदेशक अल्ताफ एम. शेख ने इस मामले में DFI के तीन निदेशकों और कंपनी के सचिव अनूप कुमार पांडे के खिलाफ कंपनी अधिनियम 2013 की धाराओं के तहत कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि DFI ने अपने नाम को बदलकर ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया करने के लिए आवेदन किया था, जिसे लेकर आपत्ति जताई गई थी क्योंकि इससे सरकारी संरक्षण का संकेत मिल सकता था।
इसके बाद, नाम परिवर्तन की प्रक्रिया के तहत DFI ने DGCA से कथित तौर पर एक फर्जी NOC जमा किया, जिसे जांच में खारिज कर दिया गया। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि DGCA ने MCA को सूचित किया कि यह NOC असली नहीं है। दस्तावेज में दिए गए फाइल नंबर DGCA के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं थे।
फर्जी दस्तावेज और अनियमितता के आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, NOC में हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी उस तारीख से पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके थे। साथ ही, एक और गंभीर आरोप में निदेशक के हस्ताक्षर को एक स्पष्टीकरण पत्र पर नकली बताया गया है। ये हस्ताक्षर कथित तौर पर एक बोर्ड प्रस्ताव की कॉपी थे, जिसके लिए कंपनी अधिनियम की धारा 158 के तहत आपराधिक जिम्मेदारी भी तय की गई है।
कंपनी मामलों के उप रजिस्ट्रार ने इस मामले में एक और मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमा संख्या 578/2026 के तहत DFI और उसके निदेशकों प्रवीण विनोद प्रजापति, राहत कुलश्रेष्ठ और विपुल सिंह के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। MCA के पत्र में इन मामलों की जांच को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।
इस बीच, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों पर कोई कार्रवाई नहीं की है, और भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है।
संबंधित मामलों में चल रही जांच और प्रतिक्रिया
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) DGCA से जुड़े भ्रष्टाचार के दो अलग-अलग मामलों की भी जांच कर रहा है। इन मामलों में ड्रोन आयात की मंजूरी से जुड़े कथित रिश्वतखोरी के आरोप हैं, जिनमें पूर्व फ्लाइंग ट्रेनिंग डायरेक्टर कैप्टन अनिल गिल और वर्तमान डिप्टी डायरेक्टर जनरल मुदावथ का नाम भी शामिल है।
इन्हीं मामलों को लेकर CVC (सर्वोच्च सतर्कता आयोग) शिकायत संख्या 16240/2026 भी दर्ज है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने निरीक्षण रिपोर्ट के निष्कर्षों पर कार्रवाई नहीं की। इन आरोपों की भी पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है।
DFI के अध्यक्ष स्मित शाह ने इस पूरे मामले पर बयान देते हुए कहा है कि फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है और उन्होंने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है।









