नेपाल में भारी बाढ़ और सुरंग हादसे का दर्दनाक असर
यह घटना केवल एक दुर्घटना की कहानी नहीं है, बल्कि उस परिवार का गहरा दुख भी है जिसने अपने बेटे को आखिरी बार देखे बिना ही उसे अंतिम विदाई दी। रक्सौल (Raxaul) के पंटोका पंचायत के भरतम्ही वार्ड संख्या-3 निवासी धर्म सिंह का बेटा राहुल कुमार सिंह नेपाल (Nepal) में काम कर रहा था। वह त्रिशूली (Trishuli) नदी के पास एंडीज कंपनी के 216 मेगावाट की परियोजना की सुरंग में कार्यरत था। 26 अगस्त 2026 का दिन उनके जीवन का सबसे कठिन दिन बन गया, जब अचानक सुरंग में पानी का तेज बहाव आ गया। इस पानी के साथ भारी मलबा भी अंदर घुस आया, जिससे राहुल सुरंग के अंदर फंस गए।
राहुल की खोज और परिवार का इंतजार
हादसे के बाद तुरंत ही रेस्क्यू टीम ने राहुल की तलाश शुरू कर दी। परिवार को उम्मीद थी कि वह सुरक्षित मिल जाएंगे, लेकिन सात दिनों की कड़ी मेहनत के बाद भी उनका कोई पता नहीं चला और शव भी बरामद नहीं हो सका। राहुल के चाचा विशम्बर सिंह ने इस दुखद घटना का वर्णन करते हुए बताया कि परिवार लगातार राहुल के लौटने की आशा में था, लेकिन समय के साथ उनकी उम्मीदें कमजोर होने लगीं। राहुल की शादी महज दो साल पहले हुई थी, और अभी तक उनके घर में कोई संतान नहीं थी। उनकी पत्नी, जिसने दो साल पहले उनके साथ जीवन बिताने का सपना देखा था, अब उनके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं कर पा रही है।
अंतिम संस्कार और परिवार का दर्द
सात दिनों तक राहुल का शव न मिलने के कारण परिवार को एक कठिन निर्णय लेना पड़ा। हिंदू परंपरा के अनुसार, जब शव नहीं मिलता, तो प्रतीकात्मक रूप से कुश से शरीर बनाकर अंतिम संस्कार किया जाता है। धर्म सिंह ने अपने बेटे के लिए कुश से बनाए गए प्रतीकात्मक शरीर का अंतिम संस्कार किया, बिना बेटे का चेहरा देखे, केवल उसकी यादों के सहारे। इस दर्दनाक पल में राहुल की पत्नी भी बहुत आंसू बहाती रही, और कहती रही, “नेपाल के पानी हमरा राजा के खा गईल…”। यह शब्द उनके गहरे दर्द को बयां कर रहे थे। नेपाल में आई बाढ़ और भारी बारिश ने कई परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया है। राहुल का परिवार भी इस त्रासदी का शिकार हुआ है, जिसमें एक पिता ने अपने बेटे को खो दिया, पत्नी ने अपने पति को, और परिवार को अपने सदस्य का अंतिम दर्शन तक नहीं मिल सका।











