दिल्ली रेस क्लब की 53 एकड़ जमीन पर केंद्र का कब्जा
दिल्ली के लुटियंस इलाके में स्थित प्रसिद्ध रेस क्लब की 53 एकड़ जमीन पर अब केंद्र सरकार का अधिकार हो गया है। गुरुवार को इस जमीन को कब्जे में लेने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया, जिससे पुराने ढांचों को पूरी तरह से गिरा दिया गया। यह रेस क्लब लगभग सौ वर्षों से घुड़दौड़ की परंपरा का प्रतीक रहा है। पटियाला हाउस कोर्ट ने इस मामले में क्लब की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद यह कार्रवाई अमल में लाई गई।
कानूनी आदेश और कब्जा प्रक्रिया
अदालत ने यह फैसला 11 अगस्त को जारी किए गए बेदखली आदेश के आधार पर दिया, जो संपदा अधिकारी द्वारा सार्वजनिक स्थान से अवैध कब्जा हटाने के कानून के तहत जारी किया गया था। न्यायालय से राहत न मिलने के बाद केंद्र सरकार ने इस परिसर पर कब्जा लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस कार्रवाई के तहत नोटिस जारी कर बताया गया कि रेस कोर्स के पास मौजूद जमीन को अधिकारियों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। इसके बाद इस संपत्ति को भूमि एवं विकास कार्यालय को सौंप दिया गया है, जो केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत आता है।
इतिहास और भविष्य की अनिश्चितता
दिल्ली के इस रेस क्लब का इतिहास घुड़दौड़ की परंपरा से जुड़ा हुआ है, जो शहर की पुरानी पहचान का हिस्सा रहा है। यहां वर्षों से घुड़दौड़ से संबंधित गतिविधियों का आयोजन होता रहा है। क्लब के परिसर में पुराने अस्तबल और दौड़ से जुड़े कई ऐतिहासिक ढांचे मौजूद थे, लेकिन बुलडोजर चलने के बाद इन सभी का अस्तित्व समाप्त हो गया है। इस कदम से रेस क्लब से जुड़े लोगों में निराशा का माहौल है। अब यह जमीन केंद्र सरकार के नियंत्रण में है, और भविष्य में यहां क्या निर्माण या विकास कार्य होंगे, इस पर अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।











